SGPC सदस्यों ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से कमेटी में फैले भ्रष्टाचार की जांच की मांग की

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चंडीगढ़: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के दर्जनों मैंबरों ने आज कमेटी में फैले भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि बादल परिवार के स्वामित्व वाले एक चैनल द्वारा श्री दरबार साहिब से प्रसारण और गुरबानी कीर्तन पर एकाधिकार स्थापित करना, श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अनादर और मुद्रण में घोटाले और एसजीपीसी के समान एक और नई ट्रस्ट व्यवस्था स्थापित करना दुर्भाग्यपूर्ण और असहनीय है। उन्होंने आगे कहा कि अगर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के भीतर के भ्रष्टाचार की जांच की जाए तो यह पंजाब सरकार के भ्रष्टाचार के समान ही साबित होगा। समिति के तहत गुरुद्वारों का प्रबंधन, शिक्षण संस्थान और प्रिंटिंग प्रेस और अन्य संस्थान करोड़ों रुपये के नुकसान में चल रहे हैं।

एसजीपीसी सदस्य मास्टर मिठू सिंह ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि 29 करोड़ 70 लाख के घाटे के साथ चालू वित्त वर्ष 2022-23 का बजट 30 मार्च को अमृतसर में पेश होने जा रहा है। यह बजट शिरोमणि गुरुद्वारा अधिनियम 1925 और प्रबंध योजना अधिनियम के अनुसार तैयार नहीं किया गया। बजट अनुमान में माझा क्षेत्र की 2991 एकड़ भूमि से होने वाली वास्तविक आय को 4 करोड़ 89 लाख 50 हजार के रूप में दर्शाया गया है जो बहुत कम है।

वहीं एसजीपीसी के कार्यकारी सदस्य गुरप्रीत सिंह रंधावा ने कहा कि एसजीपीसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन कर अपने सीधे प्रबंधित गुरुद्वारों से अत्यधिक धन जुटा रही है। गुरुद्वारों में निरीक्षकों और अधिकारियों की मिलीभगत से अलग-अलग करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार चल रहा है। वहीं अन्य सदस्यों ने प्रधान से मांग करते हुए कहा कि एसजीपीसी में भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की समिति गठित की जाए ताकि सिख जगत के सामने सारी सच्चाई आ सके।