BKU ने पश्चिम बंगाल में किया संगठन का विस्तार, Gurnam Charuni बोले- पूरे देश के किसानो को करेंगे पूंजीवादी सरकार के खिलाफ लामबंद

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भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने पश्चिम बंगाल में संगठन में पदाधिकारियो की नियुक्तिया कर संगठन का विस्तार किया है। भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम चढूनी पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर है। भाकियू चढूनी ने पश्चिम बंगाल राज्य की इकाई का गठन कर अहम नियुक्तिया की है।जिसमें श्री सुदिप चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है व प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर रॉबिन सोरेन, अब्दुल हालीम बिस्वास को नियुक्त किया गया है। महिला प्रदेश अध्यक्ष की ज़िम्मेवारी चंदाश्री दास को सोपी गई है। सुरेंद्र सिंह व प्राणजोत दे को सचिव व एसके खालीद,अतौर हुसैन,दुर्गा मलिक व अत्तिक ऊल इस्लाम को सहायक सचिव और श्रीमती जयंती बैनर्जी को को कैशियर के पद पर नियुक्त किया गया है।

गुरनाम चढूनी ने पश्चिम बंगाल के पदाधिकारियों व किसानों को संबोधित करते हुए कहा की बंगाल क्रांतिकारी धरती है जिसने देश के लिए मर मिटने वाले योद्धाओं को जन्म दिया है। चाहे देश आज़ाद होने से पहले 1859 में बंगाल के किसानो द्वारा किया गया नील आंदोलन हो या 2006 में सिंगुर में भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किया किसानो द्वारा किया गया आंदोलन हर बार किसानो के संघर्ष को जीत प्राप्त हुई है और दिल्ली के बोर्डर पर 13 महीने तक काले कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ लड़े गए देश व्यापी आंदोलन में भी बंगाल के क्रांतिकारी,जागरूक व संघर्षशील किसानो ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया व सयुंक्त किसान मोर्चा के हर आदेश का पालन मज़बूती से किया चाहे भारत बंद की बात हो या चक्का जाम करने या रेल रोकने की और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चलाए गए मिशन बंगाल के दौरन भी SKM के आदेश अनुसार बंगाल के किसान मज़दूरों ने भाजपा को हराने का काम किया व कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ अपना जनमत दिया।

चढूनी ने कहा की बंगाल ने हमेशा देश को नई दिशा देने का काम किया है और केंद्र की मौजूदा किसान विरोधी भाजपा सरकार के की देश से जड़े उखाड़ने में भी बंगाल अग्रणी भूमिका निभाएगा क्योंकि देश पर पूँजीवादी ताकते हावी हो चुकी है जो सरकार के साथ मिलकर मेहनतकश लोगों का खून चूसने का काम कर रही है और देश के प्राकर्तिक संसाधनो(जल,जंगल व ज़मीन) पर पूर्ण रूप से क़ब्ज़ा करना चाह रही है।

बंगाल के सिंगुर में 2006 में पूंजीपतियों द्वारा जबरन किए गए भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ बंगाल के किसानो ने एकजुटता से लड़ाई लड़ अपनी ज़मीन बचाई थी और अब भारत सरकार भूमि अधिग्रहण का नया क़ानून लेकर आइ है जिसमें पी.पी.पी प्रोजेक्ट्स के लिए बिना किसान की अनुमति के उसकी भूमि का जबरन अधिग्रहण किया जा सकता है इसलिए एक बार फिर देशभर के किसानो को एकजुट हो इस पूँजीवादी सरकार के ख़िलाफ़ संघर्ष का बिगुल बजाना पड़ेगा।

भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष फिलहाल 2 दिवसीय पश्चिम बंगाल के दौर पर है और भाकियू (चढूनी) के संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत करने की क़वायद में जुटे है और इसी कड़ी में देश भर के तमाम राज्यों में जाकर संगठन खड़ा किया जाएगा ताकि किसानो की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सकें और पूंजीपति व सरकार मिलकर मेहनतकश लोगों का शोषण ना कर पाए।