Balwant Rajoana की दया याचिका पर 30 अप्रैल तक फैसला लें केंद्र, SC ने दिए निर्देश, 2007 में विशेष अदालत ने सुनाई थी मौत की सजा

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 2012 में दायर बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर 30 अप्रैल तक फैसला लेने का निर्देश दिया है। राजोआना ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में मौत की अपनी सजा को उम्रकैद में बदलने का अनुरोध किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर 30 अप्रैल तक फैसला नहीं लिया जाता है तो गृह मंत्रालय के संबंधित सचिव और सी.बी.आई. के निदेशक (अभियोजन) सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड के साथ उसके समक्ष मौजूद रहेंगे।

राजोआना की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस यू.यू. ललित, एस. रवींद्र भट और पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि अदालत के पूर्व के आदेशों के बावजूद इस मामले में कुछ नहीं किया गया और केंद्र सरकार की ओर से पेश होने वाले वकील के पास कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है। केंद्र की ओर से समय दिए जाने के अनुरोध को लेकर अदालत द्वारा सुनाए गए पिछले आदेशों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि इन परिस्थितियों में वह निर्देश देती है कि मामले पर तुरंत केंद्र सरकार और सी.बी.आई. सहित विभिन्न प्राधिकारों द्वारा गौर किया जाएगा।

पीठ ने कहा कि मौत की सजा बदलने के प्रार्थना पर प्रस्ताव या आपत्ति सी.बी.आई. द्वारा 2 सप्ताह के भीतर दर्ज कराई जाएगी। पीठ ने मामले को 2 मई को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। शीर्ष अदालत 2020 में दायर राजोआना की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें मौत की सजा को इस आधार पर उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है कि वह 25 साल से जेल में है। जुलाई 2007 में एक विशेष अदालत ने मामले में राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी।