बालाकोट के गांव सुइयां में प्राइमरी स्कूल की हालत जर्जर, खुले आसमान के नीचे शिक्षा लेने को मजबूर छात्र

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पुंछ/मेंढर : शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जहां सरकार बड़े-बड़े दावे करती है आज भारत का शायद कोई ऐसा कौन होगा जहां पर शिक्षा स्कूलों में न मिल रही हो। जमीनी स्तर पर सरकार व प्रशासन के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। पुंछ जिले की मेंढर सब डिवीजन के सीमावर्ती क्षेत्र ब्लॉक बालाकोट के गांव सुइयां में एक प्राइमरी स्कूल जिस की हालत जर्जर बनी हुई है। स्कूल की इमारत बदहाली के आंसू ब्यां कर रही है। जानकारी के अनुसार इस स्कूल की स्थापना 1975 में हुई थी, जबकि आज से 11 वर्ष पहले इस स्कूल की इमारत बनाने के लिए एक ठेकेदार को ठेका दिया गया था, लेकिन आधा अधूरा कार्य छोड़ कर ठेकेदार चला गया और स्कूली छात्र इसी इमारत में अपना शिक्षा का समय व्यतीत कर रहे हैं।

ऐसे में सवाल खड़ा होता है क्योंकि आज तक इस स्कूल में किसी ने ध्यान नहीं दिया। प्राइमरी स्कूल सुइयां के लोगों ने शिक्षा विभाग व प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब उन की लापरवाही के चलते आज सीमावर्ती क्षेत्रों के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय नागरिक व भाजपा के नेता जुल्फिकर पठान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मेरे संज्ञान में यह मामला आया आज मैंने खुद स्कूल का दौरा किया और देखा कि छात्र बाहर बैठे हुए थे जब इन से बात की गई तो उन्होंने आपबीती बताई।

पठान ने केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल से मांग उठाई है और इस पर संज्ञान लिया जाए और उस समय के जो अधिकारी शिक्षा विभाग में तैनात थे जिनके द्वारा ठेकेदार को ठेका दिया गया था उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाए। इस मामले को लेकर एसडीएम मेंढर डा. साहिल जंडियाल से बात की गई उन्होंने कहा आप के माध्यम से मेरे संज्ञान में मामला आया है और मैंने डिप्टी शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है और रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई दोषी पाया गया उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।