हमने हरियाणा के आम बजट को दी नई दिशा : मुख्यमंत्री मनोहर लाल

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हिसार : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हमने प्रदेश के बजट को नई दिशा देने का काम किया है। यह डायमंड बजट है, जिसमें गुणात्मक वृद्धि पर जोर दिया है। इसमें समर्थ हरियाणा, अंत्योदय, सतत: विकास और पर्यावरण जैसे विषयों पर विशेष तौर पर फोकस किया गया। यह पहली बार है कि मंत्रियों, अर्थशास्त्रियों व समाज के प्रभुद्ध वर्ग के साथ-साथ अन्य हित्तधारकों के साथ बैठक करके बजट तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री शनिवार को हिसार की गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पिछले दिनों विधानसभा में पेश किए गए हरियाणा के आम बजट से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं परचर्चा कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार का बजट पेश करने से पूर्व 8 बैठकें कर 550 लोगों से इस संबंध में सुझाव लिए गए और चर्चा की गई। पहली बार बजट पेश करने के बाद 74 विधायकों की 8 कमेटी बनाकर इस पर चर्चा की गई, अलग-अलग सुझाव आमंत्रित किए गए। 2 मार्च से 22 मार्च तक चले बजट सत्र में 12 बैठकें हुई 50 घंटे चर्चा चली और सभी विधायकों ने अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ बजट पर चर्चा की।

500 मॉडल संस्कृति स्कूल खोले जाएंग

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इस बजट में उन्होंने शिक्षा का स्तर सुधारने पर भी जोर दिया है। इसी कड़ी में प्रदेश में 500 मॉडल संस्कृति स्कूल खोले जाएंगे। अभी इन स्कूलों की संख्या महज 138 है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या डबल हो गई है। सरकार निजी क्षेत्र के साथ जुड़कर भी काम करेगी। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के साथ-साथ गवर्नमेंट कम्यूनिटी पार्टनरशिप (जीसीपी) के साथ मिलकर काम किया जाएगा। शिक्षा नीति को बाकि राज्य 2030 तक लागू करेंगे जबकि हरियाणा ने इसे 2025 तक लागू करने का लक्ष्य लिया है।

तय पैरामीटर पर बना हरियाणा का बजट

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि किसी भी राज्य का बजट कुछ तय पैरामीटर पर बनाया जाता है, जैसे कि उस राज्य का कितना घाटा है, कितना खर्च किया गया है और कितना ऋण लिया गया है। हरियाणा का बजट केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा तय किए गए पैरामीटर के अनुरूप है, हमने इन्हें नहीं तोड़ा है। हरियाणा का ऋण-टूजीएसडीपी अनुपात 25 प्रतिशत तय किया गया है जो अभी भी 24 प्रतिशत है। वहीं पड़ोसी राज्य पंजाब की बात करें तो उनका ऋण-टू-जीएसडीपी अनुपात 48 प्रतिशत पहुंच गया है। यह ऋण-टू-जीएसडीपी सीमा से नीचे है तभी प्रदेश को 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण देने वालों की लाइन लगी हुई है। वहीं पंजाब की बात करें तो वहां का ऋणटू- जीएसडीपी ज्यादा होने की वजह से उन्हें 10 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ रहा है। फिर भी हमारा मानना है कि ऋण उतना लेना चाहिए, जितनी आवश्यकता हो।