Chandigarh में Central Service Rules लागू होने से UT के कर्मचारियों को मिलेगा फायदा, पंजाब को नहीं होगा कोई नुकसान, इस खबर से समझे समीकरण

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चंडीगढ़ः केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन आते विभागों में सेंट्रल गवर्नमैंट सेवा शर्तें लागू करने के फैसले को लेकर अब सियासत गरमाती जा रही है। पंजाब में भी इसका पुरजोर विरोध हो रहा है। वहीं इस बीच मिली जानकारी के आधार पर स्पष्ट किया जा रहा है कि यह नई अधिसूचना पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करेगी। बता दें कि…

  • चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र का गठन Punjab Reorganization Act के धारा-4 के अंतर्गत सन 1966 में हुआ। इसके गठन के बाद से केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के कर्मचारियों की सेवा शर्तें 1966-1991 तक केंद्र के पैटर्न पर आधारित थीं।
  • कर्मचारियों को पंजाब के नियमों के आधार पर 1966 से 1985 तक वेतनमान दिया गया, परन्तु 1986 से 1991 तक उन्हें केंद्र सरकार के नियमों के अंतर्गत वेतनमान मिला। फिर 1992 में भारत सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार यूटी के कर्मचारियों की सेवा और वेतन शर्तें पंजाब सिविल सेवा नियमों के अंतर्गत हो गई।
  • अब मोदी सरकार द्वारा चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश के कर्मचारियों पर केंद्रीय कर्मचारियों के नियमों को लागू करने का फैसला लिया गया है। इन परिवर्तनों से केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि, वेतन और छुट्टी के नियमों आदि के संदर्भ में लाभ मिलेगा।
  • यह नियम केवल केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के अपने कर्मचारियों पर ही लागू होते हैं। प्रतिनियुक्ति पर आए व्यक्तियों के सेवा शर्तों में कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • इन नियमों से पंजाब और हरियाणा सहित उन राज्यों के अधिकारों के हनन का कोई प्रश्न ही नहीं है जिन राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारी आते हैॆ।