Gudi Padwa 2022: इस दिन मनाई जा रही है गुड़ी पड़वा, जानिए इसका महत्व और पूजा के बारे में

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गुड़ी पड़वा महाराष्ट्रीयन समाज में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा मनाया जाता है। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। गुड़ी पड़वा के दिन अपने घरों में ध्वज लगाते है और रंगोली बनाते है। इसे उगादी और संवत्सर पडवो के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष पूरे देश में गुड़ी पड़वा का त्योहार 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। आइए जानते है इसके महत्व और पूजा के बारे में :

गुड़ी पड़वा का महत्व
गुड़ी पड़वा को अलग-अलग रूपों में चिन्हित किया गया है। कई जगह इसे नए साल की शुरुआत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के लिए गुड़ी पड़वा को ब्रह्मांड की रचना वाला दिन माना जाता है। सतयुग की शुरुआत भी इसी दिन से हुई थी। वहीं मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने युद्ध जीतने के बाद सबसे पहले गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया था। जिसके बाद मराठी समुदाय हर साल इस पर्व को मनाते हैं। अपने घरों पर झंडे को विजय प्रतीक के रूप में लगाते हैं। वह उसकी पूजा करते हैं।

स्वादिष्ट खानों के बिना अधूरा गुड़ी पड़वा
भारत में कोई भी त्योहार खानों के बगैर अधूरा है। गुड़ी पड़वा पर लोग साबूदाना वड़ा, नारियल की मिठाई, श्रीखंड, मोदक, आमरस, पूरन पोली, गुलाब जामुन, आलू वड़ा, आदि स्वादिष्य व्यजंन बनाते हैं। वह घर को रंगोली और फूलों की माला से सजाते हैं।

गुड़ी पड़वा पर की जाती है विशेष पूजा
इस पर्व पर लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं। नए सिरे से जीवन की शुरुआत करते हैं। कई लोग इस दिन नई वस्तु भी खरीदते हैं। इस दिन के खानों को विशेष माना जाता है। महिलाएं पूरन पोली बनाती हैं। वहीं कुछ लोग नीम की पत्ती और मिश्री का सेवन करते हैं। जहां नीम मुश्किल हालात और मिश्री खुशी को दर्शाता है।