आप भी जानिए ये घरेलू नुस्खे, शरीर रहेगा हमेशा स्वास्थ्य

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-थोड़ी-सी हींग पीसकर पानी में घोल लें और शीशी में भर लें। इसे सूंघने से सर्दी-जुकाम, सिर का भारीपन व दर्द में आराम मिलता है। पीठ, गले और सीने पर हींग के पानी का लेप करने से खांसी, कफ, निमोनिया और श्वास कष्ट में आराम मिलता है। पेट पर विशेषकर नाभि के आस-पास गोलाई में इस पानी का लेप करने से पेट दर्द, पेट फूलना व पेट का भारीपन दूर हो जाता है।
-त्वचा के कुछ रोगों में हींग बहुत ही प्रभावशाली होती है। यदि दाद हो गया हो तो थोड़ी-सी हींग पानी में घिसकर प्रभावित अंग पर लगाएं।
-यदि नासूर हो गया है और घाव सड़ने लगता है तो हींग को नीम के पत्तों के साथ पीसकर घाव पर लगाने से कुछ ही दिनों में आराम आ जाता है।
-अफीम का नशा उतारने के लिए थोड़ी-सी हींग पानी में घोलकर पिला दें।
-बच्चों के पेट में कीड़े होने पर जरा-सी हींग एक चम्मच पानी में घोलकर रूई के फाहे को उसमें डुबोकर बच्चे की गुदा में रख दें। इससे राहत मिलेगी। -पसलियों में दर्द उठने पर हींग को गर्म पानी में घोलकर लेप लगाएं, सूखने पर प्रक्रिया दोहराएं। आराम मिलेगा।
-हींग सूंघने से जुकाम से बंद हुई नाक खुल जाती है। हींग के चूर्ण में थोड़ा-सा नमक मिलाकर पानी के साथ लेने से निम्न रक्तचाप यानी कि लो ब्लड प्रैशर में आराम मिलता है।
-छाछ में या भोजन के साथ हींग का सेवन करने से अजीर्ण वायु, हैजा, पेट दर्द, अफारा में आराम मिलता है। जोड़ों के दर्द में इसका नियमित सेवन बहुत ही लाभदायक रहता है।
-कांटा या कांच चुभने पर हींग का घोल उस जगह लगाने पर कुछ ही समय में आराम आ जाता है।
-प्रसव के उपरांत हींग का सेवन करने से गर्भाशय की शुद्धि होती है।
-भुनी हुई हींग को रूई के फाहे में लपेटकर दाढ़ पर रखने से राहत मिलती है। दांत में कीड़ा लगने पर भी इससे आराम मिलता है।
-संग्रहणी या अतिसार में ताजा दही या छाछ के साथ इसके चूर्ण का सेवन करना बहुत उपयोगी होता है। कफ और वात जन्य विकारों में इसका चूर्ण चमत्कारिक लाभ देता है।
-हींग का धुआं सूंघने से हिचकियां बंद हो जाती हैं।