Shimla में अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ का हुआ आगाज

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शिमला : अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ का शिमला में आगाज हुआ। केंद्रीय संसदीय कार्य एवं संस्कृति राज्य मंत्री अजरुन राम मेघवाल ने ‘उन्मेष’ का उद्घाटन किया। शिक्षा मंत्री गोबिंद सिंह ठाकुर, लेडी गवर्नर अनघा अर्लेकर, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा. चंद्रशेखर कांबरा के अलावा जाने माने विद्वान जगद्गुरु रामानंदाचार्य, स्वामी राम भद्राचार्य ने भी शिरकत की। साहित्य उत्सव में देश-विदेश से करीब 425 साहित्यकार, लेखक और जाने माने विद्वान भाग ले रहे हैं। उत्सव में 64 विभिन्न कार्यक्रम होंगे और आदिवासी व लोक भाषाओं सहित 60 भाषाओं के लेखक भाग ले रहे है और अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी में केंद्रीय संस्कृति मंत्रलय और साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में ये उत्सव हो रहा है।

साहित्य उत्सव के उद्घाटन के मौके पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री अजरुन राम मेघवाल ने अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ के लिए आए हुए सभी साहित्यकारों का वह अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग पूछ रहे हैं कि ‘उन्मेष’ क्या है। इसका अर्थ प्रकट करना, सुबह-सुबह आंखें खोलना, खिलना, अभिव्यक्ति आदि को ‘उन्मेष’ को कहते हैं। उन्होंने कहा कि शिमला जैसे ऐतिहासिक शहर में यह साहित्यिक चिंतन बड़ा आयोजन है। शिमला में इस मंथन से अमृत निकालेंगे। ऐसा साहित्योत्सव प्रतिवर्ष करने का प्रयास करेंगे। यह अपनी तरह का पहला आयोजन है। यह प्रथम साहित्य सम्मेलन शिमला में हो रहा है। आदिवासी साहित्य सृजन भी विषय रहा गया।

उन्होंने कहा कि यहां पर भारत के सब लेखकों को बुलाया है यहा 60 भाषाओं के लोग है मिनी भारत यहां प्रकट है। उनका कहना था कि हम 75 साल कैसे चले यह भी चिंतन होगा और आगे 25 साल का क्या रोड मैप होगा इस पर भी चिंतन होगा। आदिवासी समाज में भी साहित्य का सृजन हो रहा है यह बहुत अच्छा है। उनका कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिय। शिमला की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यहा अनेको एतिहासिक स्थल हैं। इस जगह का अपना अलग महत्व है ऐसे मे संस्कृति मंत्रलय द्वारा पर्यटन विभाग के सहयोग से जल्द ही एक बढ़े संगीत महोत्सव के आयोजन की योजना है। जिसके लिए जल्द शिमला व आसपास के क्षेत्रों में स्थान व समय का चयन किया जाएगा। सिनेमा के लिए लेखन पर बहुत से पुरस्कारों से सम्मानित यतींद्र मिश्र ने कहा कि साहित्य अगर इस दिमाग से लिखेगा कि इसकी फिल्म बनानी है तो यह ठीक से साहित्य नहीं बन पाएगा। सिनेमा को एक फ्रेम में रचा जाता है।

साहित्य का फलक बहुत विस्तृत होता है। शायद यही कारण है कि मुंशी प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु जैसे साहित्यकार असफल रहे हैं। यही बात सिनेमा के लेखकों पर लागू होती है, उन्हें साहित्य में उल्लेखनीय पहचान नहीं मिल पाती। गुलजार साहब ने बहुत से प्रयोग किए हैं, मगर इनका शिल्प बिल्कुल नया है। उन्होंने कहा कि फिल्म को साहित्यिक दर्जा मिलना चाहिए। साहित्य उत्सव में शिरकत करने पहुंचे बॉलीवुड के जाने माने गीतकार गुलजार वीरवार को मालरोड व रिज भी घूमे। इसके बाद गेयटी थियेटर पहुंचे। गुलजार शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के अध्येता भी रह चुके हैं।

पद्म विभूषण अवार्डी साई परांजपे ने की अध्यक्षता

गेयटी थियेटर में जानी-मानी कलाकार पद्म विभूषण अवार्डी साई परांजपे ने सिनेमा और साहित्य पर कार्यक्रम की अध्यक्षता की। गुजराती के कवि प्रबोध पारेख ने कहा, मेरी पहली वफादारी सहित्य के लिए है। हमें यह कहना होगा कि सिनेमा साहित्य है और साहित्य सिनेमा है। वह सिनेमा को साहित्य के रूप में ही पाते हैं।

आज गुलजार से विशाल भारद्वाज की बातचीत होगी आकर्षण का हिस्सा

साहित्य उत्सव में 17 जून को गुलजार के साथ विशाल भारद्वाज की बातचीत भी आकर्षण का हिस्सा होगी। 17 जून के सत्र में आदिवासी लेखकों के समक्ष चुनौतियों एवं रचनापाठ की अध्यक्षता अनिल बर, गैर मान्यता प्राप्त भाषाओं में वाचिक महाकाव्य की महेंद्र कुमार मिश्र, साहित्य एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एसएल भैरप्पा, बहुभाषी कविता पाठ की माधव कौशिक, अस्मिता लेखिका सम्मेलन की पारमिता सतपथी, मीडिया, साहित्य एवं स्वाधीनता आंदोलन पर बलदेव भाई शर्मा अध्यक्षता करेंगे। 18 जून को ही मैं क्यों लिखता हूं, लिखती हूं की अध्यक्षता रघुवीर चौधरी करेंगे। वहीं अमेरिका से विजय शेषाद्रि, चित्र बैनर्जी दिवाकरुणी, मंजुला पद्मनाभन, मेडागास्कर से अभय के., दक्षिण अफ्रीका से अंजू रंजन, यूके से दिव्या माथुर, सुनेत्र गुप्ता, नीदरलैंड से पुष्पिता अवस्थी और नॉर्वे से सुरेश चंद्र शुल्क प्रवासी भारतीय साहित्यिक अभिव्यक्तियां विषय पर होने जा रहे संवाद में भाग लेंगे। इसकी विजय शेषाद्रि अध्यक्षता करेंगे।