अदाणी पॉवर से बिजली का दोबारा समझौता करने को हरियाणा मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली

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कांग्रेस सरकार के समय अदाणी पावर से 1425 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए जो समझौता हुआ था, उसे अब दोबारा किया जाएगा क्योंकि अदाणी ने बिजली देनी बंद कर रखी थी। इससे प्रदेश में बिजली संकट खड़ा हो गया था। तब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्वयं अदाणी से बात की थी और समझौता करने की बातचीत शुरू हुई थी। हालांकि बिजली सप्लाई पहले ही शुरू हो चुकी है मगर दोबारा समझौता करने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी जरूरी थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सोमवार को यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि 7 अगस्त, 2008 को हुए समझौते में अदाणी पावर लिमिटेड से 712-712 मेगावाट बिजली 2.94 रुपये प्रति यूनिट 25 साल के लिए खरीदनी थी।

यह बिजली गुजरात के मुंद्रा विद्युत परियोजना की प्रोडक्शन यूनिट नंबर 7, 8, 9 से कुल 1424 मेगावाट मिलनी थी। इसके लिए कुछ शर्तें भी थी। उन्होंने कहा कि एक शर्त थी कि देसी कोयले का जितना रेट बढ़ना था, उससे बिजली रेट में बढ़ोतरी करने का लिए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी कमीशन ने तय करना था और वह हरियाणा की बिजली कंपनियों ने अदा करना था। मगर विदेशी कोयले के बढ़े रेट के कारण बिजली उत्पादन की लागत में आई कीमत हरियाणा की बिजली कंपनियों ने अदा नहीं करनी थी। उन्होंने कहा कि विदेशी कोयले की लागत काफी बढ़ गई। पावर हाउस कंपनियां बंद करने की नौबत आ गई। तब केंद्र ने एक कमेटी गठित की। कमेटी ने कहा है कि दोबारा समझौता हो। इस साल अप्रैल और मई में बिजली संकट आया था क्योंकि 1424 मेगावाट एक अच्छी मात्रा में बिजली है।

उन्होंने कहा कि इसके दो विकल्प थे कि या तो समझौता दोबारा हो या अदालती लड़ाई लड़ते रहें। अगर चार-पांच साल बाद लड़ाई के बाद हरियाणा के हक में फैसला आ भी जाए तो इसे अब अफोर्ड करना मुश्किल था क्योंकि हरियाणा के लिए 1424 मेगावाट बिजली महत्व रखती है। यह कुल मांग का 18-20 फीसदी है। इसलिए अदाणी पावर से गुजरात और पंजाब ने दोबारा समझौते किए। हरियाणा ने भी दोबारा समझौता करना है। इसलिए मंत्रिमंडल की बैठक में समझौते को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि अब देसी कोयले से उत्पादित 83 प्रतिशत और विदेशी कोयले से 17 प्रतिशत उत्पादित बिजली खरीदेंगे। पहले समझौते के अनुसार देसी कोयले से उत्पादित 70 फीसदी और विदेशी कोयले से उत्पादित 30 फीसदी बिजली खरीदी जानी थी।

अब बदलाव के बाद थोड़ा घाटा पावर कंपनी उठाएगी और थोड़ा हरियाणा की बिजली कंपनियां उठाएंगी। फिलहाल 1200 मेगावाट लेंगे, जरूरत पड़ी तो 224 भी लेंगे, बकाया भुगतान पर एजी की सहमति ली जाएगी नए समझौते के अनुसार विदेशी कोयले से उत्पादित 224 मेगावाट की मांग छोड़ी जाएगी और केवल देसी कोयले से उत्पादित हरियाणा परिधि में 1200 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी। अगर विदेशी कोयले से उत्पादित बिजली अगर खरीदनी होगी तो कोयले की लागत और अन्य लागत वहन की जाएगी। इसके अतिरिक्त अलग-अलग मंचों और अदालतों के समक्ष स•ाी लंबित मुकदमों को वापस लिया जाएगा और निपटान किया जाएगा। साथ में जो बकाया है, उसके भुगतान के लिए एडवोकेट जनरल से सहमति ली जाएगी।