हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 1 जुलाई

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बिलावलु महला ५ ॥ जिउ भावै तिउ मोहि प्रतिपाल ॥ पारब्रहम परमेसर सतिगुर हम बारिक तुम्ह पिता किरपाल ॥१॥ रहाउ ॥ मोहि निरगुण गुणु नाही कोई पहुचि न साकउ तुम्हरी घाल ॥ तुमरी गति मिति तुम ही जानहु जीउ पिंडु सभु तुमरो माल ॥१॥ अंतरजामी पुरख सुआमी अनबोलत ही जानहु हाल ॥ तनु मनु सीतलु होइ हमारो नानक प्रभ जीउ नदरि निहाल ॥२॥५॥१२१॥

अर्थ: हे प्रभू! जैसे हो सके, वैसे (अवगुणों से) मेरी रक्षा कर। हे पारब्रहम! हे परमेश्वर! हे सतिगुरू! हम (जीव) तुम्हारे हैं, तुम हमारे पालनहार पिता हो।1। रहाउ।
हे प्रभू! मुझ गुण-हीन में कोई भी गुण नहीं है, मैं उस मेहनत की कद्र नहीं जान सकता (जो तू हम जीवों के लिए कर रहा है)। हे प्रभू! तू कैसा है और कितना बड़ा है- ये बात तू खुद ही जानता है। (हम जीवों का यह) शरीर और प्राण तेरे ही दिए हुए सरमाया हैं।1। हे हरेक के दिल की जानने वाले! हे सर्व व्यापक मालिक! बिना हमारे बोले ही तू हमारा हाल जानता है। हे नानक! (कह-) हे प्रभू जी! मेहर की निगाह से मेरी ओर देख, ताकि मेरा तन मेरा मन शीतल हो जाए।2।5।121।