Climate Change के प्रभावों पर वैज्ञानिकों ने Shimla में किया मंथन, बढ़ते तापमान को माना खतर

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शिमला : जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान में हो रही बढ़ोतरी के क्रायोस्फीयर अर्थात खेती, जंगल, पानी, बर्फ व ग्लेशियर पर पड़ने वाले इसके प्रभावों को लेकर शिमला में वैज्ञानिकों ने मंथन किया। राज्य पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग एवं हिमकोस्टे ने मंथन के मद्देनजर नीति निर्धारकों व अन्य स्टेक होल्डर्स के साथ चर्चा की। चर्चा के दौरान बैंगलूरू स्थित जलवायु परिवर्तन अध्ययन संस्थान के वैज्ञानिक डॉ अनिल कुलकर्णी ने कहा कि तापमान में 2.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी से शताब्दी के अंत तक हिमालयी क्षेत्न के ग्लेशियर 79 फीसद पिघलेंगे। उन्होंने कहा कि 4.1 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने से ग्लेशियर 89 फीसद पिघल जाएंगे।

तापमान में बढ़ोतरी को लेकर सजग करते हुए उन्होंने कहा कि इसे लेकर गंभीरता से चिंतन की दरकार है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का असर खेती के साथ साथ जंगलों पर भी पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रोधोगिकी एवम पर्यावरण परिषद के निदेशक ललित जैन ने कार्यशाला को लेकर बताया की जलवायु परिवर्तन पर प्रदेश के वैज्ञानिक व अधिकारी मंथन कर रहे हैं। ग्लेशियर को किस तरह से पिघलने से बचाया जाए व प्राकृतिक संसाधनों का दोहन वैज्ञानिक तरीके से किया जा सके इस पर बल दिया जा रहा है। जिस रफ़्तार से ग्लोबल वार्मिंग हो रही है साल 2050 तक 2.0 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ जाएंगे जिसके परिणामस्वरूप दुनिया को भयानक हीट.वेव का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन बड़ी तेजी से हो रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं पहाड़ तप रहे है, तूफान, बाढ़ और भूकंप भी बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर जीवन पर पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश में भी जलवायु परिवर्तन का असर देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कैसे कम किया जाए इसको लेकर शिमला में हिमकॉस्ट ने नीति निर्धारण पर विशेषज्ञों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक से प्रदुषण में आएगी कमी

हिमाचल में कल से एकल उपयोग प्लास्टिक वाली वस्तुओं का निर्माण, भंडारण , वितरण, बिक्री और उपयोग पर भी प्रतिबंधित लग गया है जिससे प्रदूषण में कमी आएगी।

तापमान में बढ़ोतरी पर फोकस

कार्यशाला को अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने भी संबोधित किया। उनके अलावा आईआईटीएम पुणो के वैज्ञानिक डॉ. आर. कृष्णन ने भी संबोधित किया। डॉ. कृष्णन ने हिंदुकुश में तापमान में बढ़ोतरी पर फोकस किया। डॉ. जे.सी. राणा व डॉ. एस.एस. रणधावा ने भी कार्यशाला को संबोधित किया।