Harishayani Ekadashi: इस दिन है देवशयनी एकादशी, ये तीन विशेष योग है बेहद शुभ

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देवशयनी एकादशी हर वर्ष बहुत ही धूम धाम से मनाई जाती है। इस बार देवशयनी एकादशी 10 जुलाई दिन रविवार को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। इस अगर पूरी विधि से भगवान विष्णु जी की पूजा की जाए तो आप पर भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद गमेशा बना रहता है। इस दिन भगवान विष्णु जी पूजा के तीन विशेष योग बन रहे है। आइए जानते है:

हरिशयनी एकादशी 2022 तिथि
आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरूआत: 09 जुलाई, शनिवार, शाम 04:39 बजे से
आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि की समाप्ति: 10 जुलाई, रविवार, दोपहर 02:13 बजे पर

हरिशयनी एकादशी पर बने योग और नक्षत्र
रवि योग: 10 जुलाई को प्रात: 05:31 बजे से लेकर सुबह 09:55 बजे तक
शुभ योग: प्रात:काल से लेकर देर रात 12 बजकर 45 मिनट तक
शुक्ल योग: देर रात 12 बजकर 45 मिनट से अगली सुबह तक
विशाखा नक्षत्र: प्रात:काल से लेकर सुबह 09 बजकर 55 मिनट तक
अनुराधा नक्षत्र: सुबह 09 बजकर 55 मिनट से पूरे दिन

हरिशयनी एकादशी पर बने रवि योग और शुभ योग मांगलिक दृष्टि से उत्तम हैं. आप इस समय काल में भगवान विष्णु की पूजा और देवशयनी एकादशी व्रत कथा का पाठ कर सकते हैं. इस दिन विशाखा और अनुराधा नक्षत्र भी अच्छे हैं. इन सभी योग और नक्षत्र में व्रत और पूजा पाठ आदि करना शुभ होता है.

हरिशयनी एकादशी का पारण
10 जुलाई को नियमपूर्वक हरिशयनी एकादशी का व्रत रखें. उसके बाद अगले दिन सोमवार को हरिशयनी एकादशी का पारण करें. इस दिन आप प्रात: 05:31 बजे से प्रात: 08:17 बजे के बीच पारण करके व्रत को पूरा कर लें. हरिशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं. चार माह तक वे इस अवस्था में रहेंगे. मांगलिक कार्यों के लिए भगवान विष्णु का योग निद्रा से बाहर आना जरूरी है. वे देवउठनी एकादशी को योग निद्रा से बाहर आएंगे. ऐसे में कुल चार माह तक कोई मांगलिक कार्य नहीं होंगे.