सूबे में सबसे खतरनाक Shimla के ग्रामीण हलको की सड़कें, सबसे ज्यादा होती हैं मौतें

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शिमला : हिमाचल में सबसे खतरनाक शिमला के ग्रामीण हल्को की सड़के है। नैशनल हाइवे से भी खतरनाक ग्रामीण हलको की इन सड़कों पर मौत दौड़ रही है । राजधानी शिमला के ग्रामीण हलको की उबड़ खाबड़ सड़कों पर बैठे यमदुत रोज शाम 6 से 9 बजे तक किसी न किसी के प्राण हर रहे है। राज्य टी.टी.आर. विंग की सड़क हादसो को लेकर सर्वे कर बनाई गई रिपोर्ट पर नजर दौड़ाए तो पिछले 5 सालों में शिमला के ग्रामीण हल्को की सड़कों पर सबसे ज्यादा मौत हुई है। वाहन चालकों के लिए क ब्रगाह बनती जा रही ग्रामीण हलको की इन सड़कों पर 2017 से लेकर 2021 तक 973 सड़क हादसो में 869 लोगों ने अपनी जान गंवाई तो 341 लोग अपंगता का दंश ङोलने को मजबूर हो गए और 1827 लोगों ने मौत को करीब से देखा। आंकड़ों के अनुसार जिला में कुल 973 सड़क हादसों में से 918 सड़क हादसें शिमला जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में हुए हैं। जबकि शहरी क्षेत्नों यानि मुख्य मार्गो पर 55 ही सड़क हादसें हुए हैं।

ज्यादातर सड़क हादसों में गाड़ियां सड़कों से बाहर निकल कर खाई में जा गिरी। सड़क हादसों की जांच में पता चला कि यह हादसे सड़कों के किनारे पेरापिट ना होने के कारण हुए है। यह भी सामने आया है कि ग्रामीण हल्को की सड़कों पर वाहन चालकों पर पुलिस का डर नहीं रहता क्योकि शहर व इसके आसपास के क्षेत्रों में तो पुलिस की चेकिंग और नाके होते हैं। नेशनल हाइवे पर भी पुलिस का पहरा होता है। यहां पर चालक सीट बैल्ट लगाते हैं, दो पहिया वाहन हैलमेट भी पहनते हैंए लेकिन जैसे ही वह ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचते हैं वहां कोई रोकटोक नहीं होती। न पुलिस का पहरा है न ही चालान का डटा चालक बेखौफ होकर गाड़ी चलाते हैं।

सड़कें कम चौड़ी होती है और पैराफिट भी नहीं हैए इसलिए हादसे होने का ज्यादा खतरा रहता है। प्रदेश में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होते ही सड़क हादसों में हालांकि कुछ कमी आना शुरू हो गई है। नियमों के साथ जुर्माना ज्यादा होने से वाहन चालक यातायात नियमों का पालन करने लगे हैं। ऐसे में अब हादसे भी कम हो गए हैं। दिसंबर 2020 में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया गया है। इसके बाद से लगातार हादसों में कमी दर्ज हुई। हादसों में कमी की वजह से लोगों की जानें भी कम गईं। सड़क हादसों में घायल भी कम हुए और जान-माल की काफी हद तक सुरक्षा भी हुई। पुलिस ने सितंबर 2020 और 2021 के बीच सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में एक तिहाई तक की कमी आई है।

क्या कहते हैं शिमला पुलिस अधीक्षक

शिमला पुलिस अधीक्षक मोनिका भटुंगुरू का कहना है कि सबसे ज्यादा सड़क हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने या फिर गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन सुनते हुए होते हैं। इसमें चालान की राशि बढ़ाई गई है। पुलिस का मानना है कि ज्यादा जुर्माने की राशि व पुलिस के जागरु कता अभियान से सड़क हादसे कम हुए हैं। पुलिस वाहन चालको को भी समय-समय पर जागरूक कर रही है।

सबसे ज्यादा हादसें 6 से 9 बजे के बीच हुए

हमाचल पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा सड़क हादसें शाम 6 बजे से 9 बजे के बीच होते हैं। रिकार्ड के अनुसार सुबह 3 से 6 बजे तक 147ए 6 से 9 बजे तक 296ए 9 से 12 बजे तक 397ए दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक 401ए 3 से 6 481ए 6 से 9 बजे तक 587 व 10 से 12 बजे तक 451 सड़क हादसे हुए हैं।

इस तरह कम हो गया सड़क हादसों का ग्राफ

सितंबर 2020 में शिमला में 54 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 19 लोगों की मौत हुईए जबकि 74 घायल हुए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसारए सिंतबर 2021 में 34 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 49 घायल हुए। ऐसे में हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट हुई।

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