Monkeypox Virus: भारत में मिला मंकीपॉक्स का पहला मामला, जानिए इसके लक्षण और बचाव के टिप्स

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भारत में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आने के बाद प्रशासन व स्वास्थ विभाग अलर्ट हो गया है। इसी के साथ लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। साथ ही केरल स्वास्थ्य विभाग ने मंकीपॉक्स को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है, ताकि लोग सावधान व सुरक्षित रहें। चलिए आपको बताते हैं मंकीपॉक्स के लक्षण और बचाव के तरीके क्या है, जिससे आप इस नए वायरल को फैलसे से रोक सकते हैं…

मंकीपॉक्स क्या है?

मंकीपॉक्स वायरस Poxviridae परिवार में ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से संबंधित है। ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस में वेरियोला वायरस (जो चेचक का कारण बनता है), वैक्सीनिया वायरस (चेचक के टीके में प्रयुक्त), और काउपॉक्स वायरस भी शामिल है। यह वायरस संक्रमित जानवर जैसे बंदर, गिलहरी, गैर-मानव प्राइमेट, गैम्बिया पाउच वाले चूहे, डर्मिस के काटने व खरोंच से मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकता है। हालांकि यह श्वसन संबंधी वायरस है और संपर्क में आए बिना भी मनुष्यों में फैल सकता है।

मंकीपॉक्स के लक्षण

शुरूआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं लेकिन 7-14 दिनों बाद बुखार, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके लक्षण इस प्रकार हैं…

-पूरे शरीर पर गहरे लाल रंग के दाने
-समय के साथ लाल चकत्ते का घाव का रूप ले लेना
-निमोनिया
-तेज बुखार व सिरदर्द
-मांसपेशियों में दर्द व सूजन
-ठंड लगना
-अत्यधिक थकान
-एनर्जी में कमी होना
-लिम्फ नोड्स की सूजन

संक्रमण से बचने के उपाय

चूंकि अभी तक इसकी कोई दवा या वैक्सीन नहीं बनी है इसलिए सावधानी ही इससे बचाव का पहला तरीका है।

– इस वायरस से बचने के लिए सबसे पहले तो अपने घर के आसपास साफ-सफाई बनाकर रखें।
-संक्रमित मरीज व जानवरों के संपर्क में ना आएं, खासकर बच्चों को संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें।
-संक्रमित रोगियों को अलग कमरे में रखें।
-संक्रमित मरीज के पास जाते समय हमेशा पीपीई किट का इस्तेमाल करें।
-संक्रमित मरीज या जानवर के संपर्क में आने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना ना भूलें।