सर्व-धर्म सम्भाव ‘भारतीय जीवन पद्धति का मूल मंत्र’ : Satya Pal Jain

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चंडीगढ़ के पूर्व सांसद एवं भारत सरकार के अपर महासलिसिटर सत्य पाल जैन ने कहा कि सर्व-धर्म सम्भाव का सिंद्धात भारतीय जीवन पद्धति, जीवन शैली एवं सामाजिक हस्ती का मूल मंत्र है, जिसके अनुसार सभी धर्मो को समान सम्मान देना है। उन्होंने कहा कि भारत की परम्परा सहयोग एवं सह-अस्तित्व की है, न की टकराव और अंधाधुंध विरोध की। उन्होंने आज सांय सैक्टर 19 के कैथोलिक चर्च में ‘अन्तर-धार्मिक प्रार्थना और सांप्रदायिक समन्वय संगोष्ठी’के विषय पर मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे। इसके अलावा सभी धर्मो के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि सभी धर्मो और सभी विचारों का बराबर का सम्मान भारतीय परंपरा का अटूट अंग रहा है और इसी कारण भारत सदैव धर्मनिरपेक्ष देश रहा है। 1950 में अपनाए गए भारत के संविधान ने भी सभी धर्मो को बराबर का स्थान दिया तथा सरकार द्वारा किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव पर प्रतिबंध लगाया। विभिन्न धार्मिक ग्रन्थों से उदाहरण देते हुए जैन ने कहा कि समूची मानवता को एक ही छवि से देखना, सभी धर्मो का मूल संदेश है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय चाहे वो किसी भी धर्म जाति या भाषा के हों एक हैं और सभी मिल-जुल कर भारत को दुनिया का विश्व गुरू बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हर भारतीय का यह कर्तव्य है कि वह अपने ढंग से अपने-अपने धर्म की पालना करते हुए अपना जीवन व्यतीत करे, परन्तु उसके साथ-साथ दूसरे धर्म के लोगों का भी पूरा सम्मान करे। इस कार्यक्रम में विभिन्न धर्मो के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे, जिनमें अर्नस मसीह, डॉ. सुधीर कुमार, अरविंद नोयल, सिस्टर मनीषा, अनिल सरवाल, गुरप्रीत सिंह और मुफ़्ती अनस भी शामिल थे।