प्रदेश में खुलेगा प्राकृतिक खेती शोध एवं विकास संस्थान : कृषि मंत्री Virender Kanwar

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शिमला : बैंगलूरु में आयोजित कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद शिमला लौटे सूबे के ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने उम्मीद जताई है कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती पर आधारित शोध एवं विकास संस्थान स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में हिमाचल के उपलब्धियों के मद्देनजर उन्होंने सम्मेलन में संस्थान को प्रदेश में खोलने का मामला कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष उठाया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में हिमाचल में कृषि व बागवानी विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। कंवर ने कहा कि दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसानों की आय को दोगुना करने के विज़न को साकार करने के लिए कृषि की दशा और दिशा तय करने पर सार्थक चर्चा की गई। प्रदेश ने इस समेलन के माध्यम से कृषि से जुड़े विभिन्न विषय केंद्रीय कृषि मंत्री के समक्ष उठाए। हिमाचल में हिमालय क्षेत्र की प्राकृतिक कृषि पद्धति पर शोध एवं विकास के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का संसाधन केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया गया। प्रदेश में बीज आलू के उत्पादन का विषय उठाते हुए उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व सिस्ट नेमाटोड से प्रभावित होने के कारण प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में इसका उत्पादन रोक दिया गया था। उन्होंने अनुरोध किया कि इसका उत्पादन पुन: शुरू करना आवश्यक है और प्रदेश के उन क्षेत्रों में जहां सिस्ट नेमाटोड का प्रकोप नहीं है, वहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाए।

वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्राकृतिक कृषि निश्चित रूप से रसायनिक कृषि का ऐसा विकल्प है। यह खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा और समृद्ध किसान से आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जाने का माध्यम बन सकता है। हिमाचल ने उन्होंने कहा कि प्रदेश में इसी वर्ष से जापान और भारत की सहायता से एक हजार करोड़ रुपये की लागत से जाइका चरण दो फसल विविधिकरण का कार्यक्रम प्रारभ किया गया है। वर्ष 2029 तक चलने वाले इस कार्यक्रम के अन्तर्गत किसानों की आय को बेसलाइन पर प्रति हेक्टेयर 62409 रुपए से बढ़ा कर दो लाख 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम से लगभग 10 हजार किसानों को लाभ होगा। उन्होंने समेलन में एकीकृत कृषि मॉडल के विषय पर चर्चा करते हुए इस दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।

वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों की चुनौती से पार पाते हुए प्रदेश के मेहनतकश किसानों ने बेमौसमी सब्जियोंए फूलोंए परपरागत अनाजों और फलों के उत्पादन में अपनी अलग पहचान बनाई है। हिमाचल प्रदेश कश्मीर के बाद देश में सबसे बड़ा उत्पादक है। डबल इंजन सरकार की किसान बागवानों के लिए कल्याणकारी नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करने में भी हिमाचल अग्रणी रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश को कृषि कर्मण पुरस्कार और ईनाम में पीएम एक्सीलेंस इन सिविल सर्विस अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं।