NDPS केसों की जांच कर रहे जांच अफसरों व FSL के कैमिकल एग्जामिनरों को दी जाए स्पैशल ट्रेनिंग : High Court

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चंडीगढ़ : एन.डी.पी.एस. केसों में जांच अधिकारियों या कैमिकल एग्जामिनरों द्वारा तय प्रक्रिया का बार-बार उल्लंघन किए जाने पर हाईकोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब के डी.जी.पी. को आदेश दे दिए हैं कि वह इन केसों की जांच कर रहे जांच अधिकारियों को स्पैशल ट्रेनिंग करवाएं। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर ने एन.डी.पी.एस. एक्ट के दो आरोपियों द्वारा अपनी नियमित जमानत की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए डी.जी.पी. को यह आदेश दिए हैं।

जस्टिस ठाकुर ने कहा कि वह यह लगातार नोटिस कर रहे हैं कि अदालत में मामले की केस प्रापर्टी पेश करते समय और गवाही के समय जांच अधिकारी बेहद लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसा लगता है कि पंजाब में ऐसे केसों की जांच कर रहे जांच अधिकारियों को जागरूक करने की जरूरत है और इसके लिए हाईकोर्ट ने पंजाब के डी.जी.पी. को आदेश दिए हैं कि वह एनडीपीएस केसों की जांच कर रहे जांच अधिकारियों को अलगअलग बैच में स्पैशल ट्रेनिंग करवाएं।

डी.जी.पी. को छह महीनों में बताना होगा कि क्या सभी जांच अधिकारियों को दी जा चुकी ट्रेनिंग या नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारियों के फोरैंसिक लैब्स के कैमिकल एग्जामिनरों को भी इसके लिए ट्रेनिंग दी जानी जरूरी है, जो संबंधित एफ.एस.एल. में तैनात हैं, पहले भी यह देखा है कि जिस समय नमूना कपड़े के पार्सल में भेजा जाता है। संबंधित एफ.एस.एल., रासायनिक विश्लेषक, जो वहां काम करते हैं, अपनी रिपोर्ट में उस पर कोई टिप्पणी नहीं करते हैं। पार्सल खोले जाने के बाद नमूने लेकर फिर सील किए जाने और उस पर मोहर लगाने तक की प्रक्रिया का सही पालन ही नहीं हो रहा है। इस तरह की लापरवाही के कारण अभियुक्त बरी हो सकते हैं। लिहाजा हाईकोर्ट ने अब डी.जी.पी. को आदेश दे दिए हैं कि वह एन.डी.पी.एस. एक्ट का सैक्शन42 जिसमें इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी है, उसकी जांच अधिकारियों और फोरैंसिक लैब्स के कैमिकल एग्जामिनरों को ट्रेनिंग दी जाए और छह महीने में हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दी जाए।