Himachal Pradesh में Corona संक्रमण ने फिर पकड़ी रफ्तार, 18 से 24 July के बीच पॉजिटिविटी दर पहुंची 14.3 %

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शिमला : हिमाचल में कोरोना संक्रमण की पॉजिटिविटी दर में लगातार इजाफा हो रहा है। संक्रमण के मामले बढ़ने से लोगों में कोरोना का खौफ भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। रोजाना कोरोना के सैकड़ों नए मामलों के सामने आने से प्रदेश सरकार इसे गंभीरता से लेने लगी है। संक्रमण की रफ्तार इसी कदर जारी रहने की स्थिति में एक मर्तबा फिर सर्वाजनिक स्थलाें पर मास्क पहनने की नौबत आ सकती है। हालांकि सरकार ने मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने को लेकर जारी स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी को वापस नहीं लिया है।

मगर एडवाइजरी की अनुपालना में लोगों की लापरवाही को देखते हुए इसे लेकर सख्त निर्देश जारी हो सकते है। राज्य में 11 से 17 जुलाई के बीच कोरोना संक्रमण की पॉजिटिविटी दर 10.7 फीसदी थी। इस दौरान 22077 कोरोना के सैंपल जांचे गए। इनमें से 2371 पॉजिटिव निकले। इसी सप्ताह मंडी जिला में सर्वाधिक 19.3 तथा चंबा में 14.2 फीसदी संक्रमण दर थी। 11 से 17 जुलाई के बीच प्रदेश में चंबा में 3, कुल्लू में एक तथा लाहौल स्पिति में एक कोरोना संक्रमित की मौत हुई।

मगर 18 से 24 जुलाई के बीच न सिर्फ संक्रमण की दर में करीब 4 फीसदी का इजाफा हुआ है बल्कि मृतकों की संख्या भी बढ़ी है। 18 से 24 जुलाई के बीच मंडी में 4, ऊना 2 तथा शिमला में एक कोरोना संक्रमित की मौत हुई। इस अवधि के दौरान प्रदेश में कुल 28410 कोरोना के सैंपल जांचे गए इनमें से 4063 पॉजिटिव पाए गए। कोरोना की पॉजिटिविटी दर 14.3 प्रतिशत रही। आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश के मंडी, शिमला, कुल्लू, कांगड़ा, किन्नौर, चंबा, हमीरपुर व सोलन जिलों में संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है।

हालांकि जनजातीय जिला लाहौल स्पिति में भी कोरोना की पॉजिटिविटी दर बढ़ी है। मगर यह बाकी जिलों के मुकाबले कम है। लाहौल स्पिति में 11 से 17 जुलाई के बीच कोरोना की पॉजिटिविटी दर 7 फीसदी थी जो अब बढ़कर 8.7 प्रतिशत हो गई है। बिलासपुर जिला में इस दर में करीब 6 फीसदी का इजाफा हुआ है। लिहाजा संक्रमण से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी की अनुपालना आवश्यक है।

प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में बगैर मास्क के प्रवेश की अनुमति नहीं

उधर, प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में बगैर मास्क के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही। खास तौर पर शिमला के आईजीएमसी, रिपन व राज्य के अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में उपचाराधीन रोगियों और चिकित्सकों के साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण से बचाने के मद्देनजर एहतियातन यह कदम उठाया गया है।