केंद्र सरकार जल्द ही हाटी समुदाय के हित में लेगी फैसला : CM Jai Ram Thakur

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शिमला : चुनावी साल में सिरमौर जिला के गिरीपार को जनजातीय क्षेत्र को जल्द जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार गिरीपार को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा प्रदान करने के मुद्दे पर संजीदा हुई है। हालांकि इलाके में अनुसूचित जाति के लोग समूचे गिरी पार को जनजातीय दर्जा देने के पक्ष में नहीं। बावजूद इसके सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को लेकर राज्य के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने बीते रोज चंडीगढ़ में आयोजित मादक पदार्थों की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सम्मेलन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सिरमौर जिले के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा प्रदान करने के संबंध में विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार जल्द ही इस विषय पर हाटी समुदाय के हित में उचित निर्णय लेगी। जयराम ठाकुर ने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार शीघ्र ही हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देगी और समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने पूर्व में केंद्रीय सामाजिक कल्याण एवं अधिकारिता मंत्री से भी चर्चा की है। गिरी पार के हाटी समुदाय के लोगों की आबादी करीब 3 लाख है। हाटी समुदाय क्षेत्न की 144 पंचायतों में निवास करता है। ये लोग उत्तराखंड के जौनसार बावर की तर्ज पर जनजातीय दर्जा प्रदान करने की मांग कर रहे हैं। जौनसार बावर को 1967 में जनजातीय क्षेत्र घोषित किया जा चुका है।

इसके बाद 1969 से गिरी पार के हाटी समुदाय के लोग भी जनजातीय दर्जा प्रदान करने की मांग कर रहे हैं। सनद रहेकि जौनसार बावर किसी जमाने में सिरमौर रियासत का हिस्सा था। गढ़वाल के राजाओं के साथ-साथ गोरखों ने भी इस क्षेत्र पर कब्जा किया। यह इलाका कुछ सालों तक अंग्रेजों के अधीन भी रहा। सिरमौर रियासत का हिस्सा होते हुए जौनसार बावर की कालसी सिरमौर की राजधानी भी रह चुकी है।