Mangala Gauri Vrat: सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, इस तरह करें मंगला गौरी जी का स्तोत्र पाठ का जप, मिलेगा लाभ

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सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां मंगला गौरी जी की पूजा की जाती है और विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लम्बी उम्र की कामना कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। माना जाता है की इस दिन व्रत रखने और मां मंगला गौरी जी की पूजा करने से सुखी जीवन भी प्राप्त होता है। इस दिन मंगला गौरी जी का स्तोत्र पाठ भी करने चाहिए इससे मां मंगला गौरी जी प्रसन्न होती है। मंगला गौरी स्तोत्र की रचना संस्कृत में की गई है. इसमें मां मंगला गौरी से रक्षा करने, सभी विपदाओं को दूर करने और जीवन में खुशहाली एवं मंगल प्रदान करने की प्रार्थना की गई है. इसके अलावा मां मंगला गौरी से पुत्र, संतान की सुरक्षा के साथ उनमें वृद्धि करने का भी आशीष मांगा गया है. मंगला गौरी स्तोत्र का पाठ करने से पूर्व आपको माता मंगला गौरी की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए. उसके बाद ही यह पाठ प्रारंभ करें. मंगला गौरी स्तोत्र का समापन होने के बाद मां मंगला गौरी की आरती करें और देवी से मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें.

मंगला गौरी स्तोत्रम्
रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके।
हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके॥

हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके।
शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके॥

मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले।
सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये॥

पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते।
पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्॥

मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले।
संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्॥

देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः।
प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे॥

तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।
वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने॥

मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले।
इति मंगलागौरी स्तोत्रं सम्पूर्णं