सरकार ने बागवानों की मांगे नहीं मानी तो Himachal में भी Delhi की तर्ज पर होगा आंदोलन

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शिमला : हिमाचल के बागवानों की 1987 और 1990 में आंदोलन के बाद अब आज से निर्णायक लड़ाई की शुरुआत होगी। सरकार ने बागवानों की मांगे नहीं मानी तो हिमाचल में भी दिल्ली की तर्ज पर आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। क्याेंकि केंद्र और राज्य सरकार की किसान-बागवान विरोधी नीतियों के कारण 5000 करोड़ रुपए से अधिक का सेब उद्योग संकट में आ गया है।

संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि बागवान शांतिपूर्ण ढंग से ऐतिहासिक मार्च करेंगे। इससे पहले बागवानों ने 1987 और 1990 में ऐसे बड़े आंदोलन लड़े हैं। इस बार फिर से ऐसी ही निर्णायक लड़ाई की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि बागवानों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को 20 सूत्रीय मांग पत्र सौंप रखा है। इसमें से चार से पांच मांगे मान ली गई है, लेकिन ज्यादातर मांगों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

इससे पहले बागवान ठियोग, रोहड़ू, नारकंडा, आनी, कोटखाई, चौपाल इत्यादि सेब बहुल क्षेत्रों में कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों की इस हड़ताल का कांग्रेस, माकपा और आम आदमी पार्टी भी समर्थन कर रही है। इससे सत्तारूढ़ भाजपा बेकफुट पर आ गई है।

अब घाटे का सौदा साबित हो रही सेब की खेती

कृषि इनपुट पर उपदान खत्म करने, जीएसटी लगाने से खाद, बीज, दवाइयां, कृषि औजार और कार्टन की कीमते दो से तीन साल में दोगुना हो गई है, जबकि बागवानों को फसल का दाम आज भी 10 साल पहले वाला ही मिल रहा है। इससे सेब की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।

सोशल मीडिया का भरपूर प्रयोग कर रहे बागवान

आक्रोष रैली में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल करने के बागवान सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा ही एक वीडिया शिक्षा कायथ नाम की बागवान महिला ने फेसबुक पर पोस्ट किया है। इसमें शिक्षा कायथ 5 अगस्त के सचिवालय के घेराव में शामिल होने की अपील कर रही है। इस वीडियों को 2 लाख 9 हजार से अधिक लोग देख चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सेब तैयार करने वाली लागत में बढ़ोतरी से बागवानों में कितना रोष है। इसी तरह अन्य बागवानों की अपील की वीडियों में धड़ाधड़ शेयर की जा रही है।

सरकार बनी मूकदर्शक इसलिए उतरना पड़ा सड़कों पर : सोहन ठाकुर

सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने बताया कि कल की आक्रोष रैली में 27 संगठनों से प्रतिनिधि और प्रदेशभर से सैंकड़ों बागवान शिमला पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि महंगाई ने बागवानों की कमर तोड़ दी है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। इसलिए बागवानों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

बागवान बताएंगे सरकार को अपनी ताकत : राकेश सिंघा

ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने बताया कि सरकार पर बागवानों की अनदेखी भारी पड़ने वाली है। प्रदेश की जनता आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को इसका जवाब दे देंगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने खुद बागवानों को खेत.खलियान छोड़कर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। अब बागवान सरकार को अपनी ताकत बताएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार को बागवानों की सारी मांगे पूरी करने होगी। अब आश्वासन से बात बनने वाली नहीं है।

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