Gurjit Kaur ने हॉकी के लिए 1 साल की उम्र में छोड़ा घर, आज कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाई जीत, परिवार में ख़ुशी का माहौल

Spread the News

चंडीगढ़ : भारतीय महिला हॉकी टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। कॉमनवेल्थ खेलों में हॉकी मैच के दौरान पंजाब के अमृतसर में अजनाला के गांव मियादीया कलां की गुरजीत कौर का नाम बहुत चर्चा में रहा। गुरजीत कौर उनकी और उनकी टीम की इस जीत से बहुत खुश है। पुरे गांव में ख़ुशी का माहौल है। लेकिन गुरजीत कौर का यहां तक का सफर आसान नहीं था। गुरजीत ने 11 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था। परिवार ने उसे तरनतारन के कैरों गांव की सरकारी खेल एकेडमी में भेज दिया। छठीं क्लास से उसने हॉस्टल में रहना शुरू किया और 6 साल तक माता-पिता से दूर रहकर कोच चरणजीत सिंह से हॉकी की बारीकियां सीखीं। वह यहां बाहरवीं तक यहीं रहीं।

पैसों और संसाधनों की कमी के चलते गुरजीत अपने घर मां-बाप से मिलने नहीं जा पाती थीं। उनके पिता सतनाम सिंह और मां हरजिंदर का कहना है कि सरहदी गांव से निकलकर बेटी इंटरनेशनल हॉकी प्लेयर बनी। अफसोस यह है कि जब उसने खेलना शुरू किया तो गांव में खेल स्टेडियम नहीं था। अच्छे स्कूल भी नहीं थे। पिता सतनाम सिंह गुरजीत और उसकी बहन प्रदीप कौर को साइकिल पर रोज गांव से 12 किलोमीटर दूर स्कूल छोड़ने जाते और तपती धूप में लेने भी जाते थे।