Raksha Bandhan: इस दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानिए इसकी पौराणिक कथा के बारे में

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रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के प्रेम और अटूट रिश्ते को दर्शाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है। यह त्योहार हर साल सावन मास में मनाया जाता है। इस बार भी यह त्योहार सावन मास की तिथि 11 अगस्त दिन गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस दिन का सभी बहनों को बहुत ही बेसब्री से इंतज़ार रहता है। आइए जानते है रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा के बारे में:

सबसे पहले पति-पत्नी ने बांधी थी राखी
रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्यार के प्रतीक के रूप में नहीं था. इंद्र और इंद्राणी की पौराणिक कथा से इसका पता चलता है. पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और राक्षसों के बीच चल रहे युद्ध के दौरान इंद्र राजा बलि से हार रहे थे, तब इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की. भगवान विष्णु ने इंद्राणी को एक पवित्र धागा दिया, जिसे उन्होंने इंद्र की कलाई पर बांध दिया. इसके बाद युद्ध में इंद्र की विजय हुई. वह धागा किसी भी बुराई के खिलाफ उनकी सुरक्षा बन गया.

सिकंदर की पत्नी ने जब भेजी राखी
प्रचलित कहानियों के अनुसार, पूरी दुनिया पर फतह हासिल करने वाले जब सिकंदर का भारत में पुरु से सामना हुआ था. तब युद्ध में सिकंदर पराजित हो गया था. उस दौरान सिकंदर की पत्नी ने उनकी जान बख्शने के लिए राजा पुरु को राखी भेजी थी. कहा जाता है कि उसके बाद पुरु सिकंदर पर हाथ नहीं उठा सके और उसे बंदी बना लिया था. हालांकि, सिकंदर ने पुरु को राज्य वापस कर दिया था.