कोयला घोटाला मामला: पूर्व कोयला सचिव HC Gupta को हुई 3 साल की जेल

Spread the News

नई दिल्ली : यहां की एक विशेष अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र में लोहारा ईस्ट कोल ब्लॉक के आवंटन से जुड़े एक मामले में पूर्व कोयला सचिव एच. सी. गुप्ता को तीन साल कैद और पूर्व संयुक्त सचिव के. एस. क्रोफा को दो साल की जेल की सजा सुनाई।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, नागपुर के आवंटन के लिए सरकार को धोखा देने की साजिश के लिए गुप्ता पर 1 लाख रुपये और क्रोफा पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

ग्रेस इंडस्ट्रीज पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और इसके निदेशक और मामले के एक अन्य आरोपी मुकेश गुप्ता को चार साल कैद की सजा सुनाई गई। उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

29 जुलाई को सीबीआई कोर्ट ने अपराध के मामले में आरोपी को दोषी करार दिया था। कोयला घोटाला मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने कहा, ‘‘उपरोक्त वर्णित साक्ष्य से पता चलता है कि ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मुकेश गुप्ता, एचसी गुप्ता और केएस क्रोफा के बीच ग्रेस इंडस्ट्रीज के पक्ष में लोहारा ईस्ट कोल ब्लॉक के आवंटन की सिफारिश हासिल करने के लिए आपराधिक साजिश रची गई थी।’’

3.5 वर्ग किमी के क्षेत्र में स्थित कोयला ब्लॉक और लगभग 5.7 करोड़ टन के भूगर्भीय भंडार का अनुमान था, मुरली इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साथ ग्रेस इंडस्ट्रीज को संयुक्त रूप से आवंटित किया गया था।

सीबीआई के बयान के अनुसार, जांच के दौरान यह पता चला कि ग्रेस इंडस्ट्रीज ने शुद्ध मूल्य, क्षमता, उपकरणों, खरीद की स्थिति और संयंत्र की स्थापना के बारे में गलत जानकारी के आधार पर लोहारा ईस्ट कोयला ब्लॉक में 16.14 मिलियन टन कोयला भंडार का आवंटन हासिल किया था।

यह पाया गया कि उक्त निजी कंपनी ने अपने आवेदन में 120 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति का दावा किया, जबकि इसकी अपनी निवल संपत्ति 3.3 करोड़ रुपये थी और 30,000 टीपीए की वास्तविक परियोजना क्षमता के मुकाबले अपनी मौजूदा क्षमता को 1,20,000 टीपीए के रूप में गलत बताया गया।

कंपनी ने उत्पादन में दो भट्टों और स्थापना के तहत 3 भट्टों का दावा किया, जबकि 7 सितंबर, 2006 को, उसके पास केवल एक भट्ठा परिचालन में था। कोल ब्लॉक के आवंटन के बाद मुकेश गुप्ता ने अपनी कंपनी की पूरी इक्विटी/शेयर किसी अन्य व्यक्ति को लगभग 20 करोड़ रुपये के लाभ पर बेच दी।

यह पाया गया कि 51 निजी कंपनियों ने उक्त कोयला ब्लॉक के लिए आवेदन किया था, हालांकि, सबसे उपयुक्त कंपनी का निर्धारण करने के लिए परस्पर प्राथमिकता के मानदंड का पालन नहीं किया गया था। कंपनी ने एक अधूरा आवेदन भी प्रस्तुत किया था, जिसे कोयला मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार खारिज किया जा सकता था।

मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों ने आवेदनों की जांच सुनिश्चित नहीं की। इसके अलावा, कंपनी के आवेदन को इसके मूल्यांकन के लिए संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय, इस्पात मंत्रालय को भी नहीं भेजा गया था।

यह भी पाया गया कि कंपनी को इस्पात और बिजली मंत्रालयों और महाराष्ट्र सरकार की सिफारिशों के बिना कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए सिफारिश की गई थी। इसके अलावा, अन्य आबंटिती कंपनी द्वारा लिखित शिकायत के बावजूद कंपनी को अतिरिक्त कोयला आवंटित किया गया था।