Haryana विधानसभा में पारित किए गए 4 बिल

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हरियाणा विधानसभा में बुधवार को चार विधेयक पारित किए गए। इनमें हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2022, हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2022, हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2022 और हरियाणा नगर पालिका (संशोधन) विधेयक 2022 शामिल हैं।

अब प्राधिकरण बल्क और उपचारित अपशिष्ट जल के लिए तय करेगा शुल्क
हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण अधिनियम 2020 को संशोधित करने के लिए हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2022 पारित किया गया। अधिनियम 2020 की धारा-18 में संशोधन किया गया है। अब प्राधिकरण द्वारा बल्क और उपचारित अपशिष्ट जल के लिए शुल्क का निर्धारण किया जाएगा। प्राधिकरण मतिव्ययता, दक्षता, समानता और स्थिरता के सिद्धांतों और सतही जल और उपचारित अपशिष्ट जल के अत्यधिक मात्रा में उपयोग के लिए दरें तय करेगा। ये दरें पानी की खपत के आधार पर तय होंगी। प्राधिकरण व्यक्तिगत घर, उद्योग या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान के लिए पानी के उपयोग के हिसाब से पानी की खुदरा दरें भी तय करेगा।

हरियाणा नगर निगम संशोधन विधेयक 2022
हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक 1994 को आगे संशोधित करने के लिए हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2022 पारित किया गया है। विधेयक 1994 की धारा 330, 331, 335, 336 व 352 के साथ द्वितीय और तृतीय अनुसूची में संशोधन किया गया है। वित्त विभाग द्वारा सूचित किया गया कि पालिका क्षेत्रों में अचल संपत्तियों के पंजीकरण पर दो प्रतिशत स्टाम्प शुल्क संबंधित नगर निगम या शहरी स्थानीय निकाय विभाग को एक-एक प्रतिशत की दर से समान रूप से सीधे तौर पर स्थानांतरित किया जाएगा। इस प्रक्रिया को 01 अप्रैल 2021 से लागू किया गया था। इससे पहले शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा पालिकाओं स्टाम्प शुल्क दिया जा रहा था। हालांकि प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) हरियाणा ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि निकाय विभाग द्वारा नगर निगम और निदेशालय को वितरित किए जा रहे स्टाम्प शुल्क की प्रक्रिया उचित नहीं है। क्योंकि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्टाम्प शुल्क संबंधित नगर निगम को ही दिया जाना है। इस विसंगति को दूर करने और इस संबंध में सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं में अनुरूपता लाने के लिए विधेयक 1994 में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1904 में व्यापार/व्यावसायिक लाइसेंस के प्रावधान पंजाब नगर पालिका अधिनियम 1911 के अनुरूप हैं। उस दौरान केवल पालिका ही नियामक प्राधिकरण होती थी जबकि आज के समय में कई नियामक प्राधिकरण जैसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कारखाना औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य ने अधिनियम 1948 के तहत स्थान ले लिया है। अति ज्वलनशील सामग्रियां भी अधिकृत प्राधिकारी द्वारा अलग कानून के तहत विनियमित हैं। इस प्रकार अन्य वैधानिक प्राधिकारियों द्वारा विनियम किए जाने वाले उद्योगों को पालिकाओं द्वारा भी लाइसेंस जारी करने का कोई औचित्य नहीं है। हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 की संबंधित धाराओं में व्यापार/व्यावसायिक लाइसेंस प्राप्त करने व इनके वार्षिक आधार पर नवीनीकरण करवाने का प्रावधान है। वर्तमान में नगर निगमों को अपने सदन की बैठकों में प्रस्ताव पास करके व्यापार/व्यवसायिक लाइसेंस फीस की दर निर्धारित करने की शक्तियां प्राप्त हैं। इससे राज्य की नगर निगमों में व्यापार/व्यवसायिक लाइसेंस फीस का निर्धारण करने में भिन्नताएं हो गई हैं, जिससे जनसाधारण में होती है। राज्य के सभी नगर निगमों में व्यापार/व्यवसायिक लाइसेंस फीस की दर निर्धारित करने में एकरूपता लाने और इनकी अनिवार्यता को सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट ऐसे प्रयोजन, जो जीवन, स्वास्थ्य या संपत्ति के लिए खतरनाक हों या जिससे उत्पात उत्पन्न होने की संभावना हो तक लागू रखने की अति आवश्यकता है। यह नियामक प्राधिकरणों की बहुलता को समाप्त करके शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को आसान करेगा। इसके अतिरिक्त पशु-पक्षियों को नगर निगमों की सीमा में रखने और पालने की पाबंदियों के लिए प्रावधान किया गया ह