भारत अन्य देशों की तरह सार्वजनिक रूप से एक-चीन सिद्धांत का रुख दोहराए: चीनी राजदूत Weitong Sun

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चीन: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी की यात्रा से ताइवान जलडमरू मध्य में तनाव पैदा हुआ है। इस मुद्दे पर अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच क्वाड तंत्र के सदस्य के रूप में भारतीय अधिकारी चुप हैं। जैसे ही बाहरी दुनिया भारत के रवैये के बारे में अनुमान लगा रही थी, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अचानक 12 अगस्त को एक बयान दिया, जिसमें कहा गया है कि भारत की संबंधित नीतियां एक जैसी हैं और उन्हें दोहराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सीधे तौर पर एक-चीन सिद्धांत का पालन करने का उल्लेख नहीं किया गया।

इस बयान ने भारतीय और अमेरिकी मीडिया का ध्यान खींचा। ब्लूमबर्ग के अनुसार भारत आधिकारिक तौर पर एक-चीन सिद्धांत का पालन करता है, लेकिन सीमा संघर्ष और अन्य कारणों से भारत ने हाल के वर्षों में द्विपक्षीय दस्तावेजों और सार्वजनिक बयानों में इस रवैये को नहीं दोहराया है।

13 अगस्त को भारत स्थित चीनी राजदूत सुन वेइतोंग ने पेलोसी की ताइवान यात्रा पर मीडिया संगोष्ठी का आयोजन किया। सुन वेइतोंग ने कहा कि एक-चीन सिद्धांत चीन-भारत संबंधों की राजनीतिक नींव है और चीन के लिए भारत सहित अन्य देशों के साथ संबंध विकसित करने की मूलभूत शर्त है। उन्होंने आशा जताई कि भारत कई अन्य देशों की तरह एक-चीन सिद्धांत के पालन को सार्वजनिक रूप से दोहराएगा।

सुन ने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ताइवान जलडमरू मध्य में मौजूदा तनाव का कारण यह है कि अमेरिका ने चीन के कड़े विरोध और बार-बार मामला उठाने के बावजूद अपनी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी के लिए ताइवान यात्रा करने की व्यवस्था की। तो अपनी संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा करने के लिए दृढ़ प्रतिक्रिया करना चीन के लिए स्वाभाविक, उचित व वैध है। घटना की जिम्मेदारी पूरी तरह से अमेरिकी पक्ष पर है।

उन्होंने आगे कहा कि चीन को उम्मीद है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करेगा, चीन के न्यायसंगत रुख और राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा के लिए चीन के प्रयासों को समझेगा और समर्थन करेगा और एक-चीन सिद्धांत का पालन करेगा। और साथ ही उन्होंने यह आशा भी जतायी कि भारतीय मीडिया के मित्र “थाईवान स्वतंत्रता” अलगाववादी ताकतों के उकसाने के प्रति सतर्क रहेंगे, थाईवान से संबंधित रिपोर्टों में निष्पक्षता, तर्कसंगतता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को बनाए रखेंगे, और चीन विरोधी ताकतों और “थाईवान स्वतंत्रता” अलगाववादी ताकतों के नेतृत्व से बच सकेंगे।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)