85 साल में पहली बार फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ को किया निलंबित, नियमों के उल्लंघन पर लिया फैसला

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नई दिल्ली: विश्व फुटबॉल संचालन संस्था फीफा ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण भारतीय फुटबॉल महासंघ (ए.आई.एफ.एफ.) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फीफा के नियमों के गंभीर उल्लंघन की वजह से यह निर्णय लिया गया है। भारतीय फुटबॉल महासंघ को अपने 85 साल के इतिहास में पहली बार फीफा से निलंबन झेलना पड़ा है। ए.आई.एफ.एफ. को सस्पैंड करने का मतलब है कि अंडर-17 महिला फुटबॉल वर्ल्ड कप टूर्नामैंट जोकि देश में 11 से 30 अक्तूबर के बीच में आयोजित होने वाला था, अब तय समय पर नहीं होगा। इसकी मेजबानी भारत से छीनी भी जा सकती है। इस महीने की शुरुआत में ही विश्व फुटबॉल संचालन संस्था फीफा ने तीसरे पक्ष (प्रशासकों की समिति/ सी.ओ.ए.) के हस्तक्षेप के कारण भारतीय फुटबॉल महासंघ को निलंबित करने की धमकी दी थी। इसके साथ ही फीफा ने अक्तूबर में होने वाले महिला अंडर-17 विश्वकप की मेजबानी के अपने अधिकार भी छीन लेने की चेतावनी दी थी। ए.आई.एफ.एफ. के चुनाव फीफा परिषद के सदस्य प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व में दिसंबर 2020 तक होने थे, लेकिन इसके संविधान में संशोधन पर गतिरोध के कारण इसमें देरी हुई। इसके बाद 3 अगस्त सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत चुनाव कराने का आदेश दिया था और कहा था कि निर्वाचित समिति (सी.ओ.ए.) 3 महीने की अवधि के लिए एक अंतरिम निकाय होगी। इस पर 5 अगस्त को फीफा ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को लेकर भारतीय फुटबॉल महासंघ को निलंबित करने की धमकी दी थी। फीफा के नियमों के मुताबिक सदस्य संघों को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मई में ए.आई.एफ.एफ. को भंग कर दिया था और खेल को संचालित करने, ए.आई.एफ.एफ. के संविधान में संशोधन करने और 18 महीने से लंबित चुनाव कराने के लिए 3 सदस्यीय समिति की नियुक्त की थी। जवाब में फीफा और एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने ए.एफ.सी. महासचिव विंडसर जॉन के नेतृत्व में एक टीम को भारतीय फुटबॉल के हितधारकों से मिलने के लिए भेजा और ए.आई.एफ.एफ. के लिए जुलाई के अंत तक अपनी विधियों में संशोधन करने और बाद में 15 सितंबर तक नवीनतम चुनाव संपन्न करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया था।