Rampur Bushahr में 2 साल से अधर में लटका Trauma Center का कार्य, अधिकारी फाइलों को घुमाने में निकाल रहे समय

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रामपुर बुशहर : शिमला जिला के रामपुर उपमंडल में स्थित 4 जिलों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने वाले खनेरी अस्पताल में ट्रामा सैंटर का कार्य लगभग 2 सालों से बंद पड़ा हुआ है। इस ओर स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सरकार भी कोई ध्यान नहीं दे रही है। रामपुर बुशहर में 4 जिलों के लोग अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। उन्हें यहां पर सही सुविधा मिले इसी उद्देश्य के साथ यह ट्रामा सैंटर यहां पर स्थापित किया जाना है, लेकिन विभाग की लापरवाही इस कदर सामने आ रही है इस ट्रामा सैंटर का निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार अधिकारी फाइलों को नीचे ऊपर घुमाने में ही समय निकाल रहे हैं।

बार-बार कमियां फाइलों में निकालने के कारण फाइलें नीचे ऊपर ही घुमाई जा रही है। उच्च अधिकारियों द्वारा फाइलों को ठीक करने के लिए बार-बार नीचे अधिकारियों को भेजी जा रही है, जिसमें लगभग 2 साल का समय निकाल दिया गया है। इसका कार्य 8 अगस्त, 2017 को शुरू कर दिया गया था पूर्ण करने का समय मार्च 2019 रखा गया था, लेकिन अभी 2022 भी समाप्त होने वाला है, लेकिन ट्रामा सैंटर का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है।

यदि इसका जो बैलेंस वर्क रहता है, उसे समय रहते किया जाए तो दो-तीन महीने में ट्रामा सैंटर का कार्य पूर्ण किया जा सकता है। लेकिन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही इस कदर सामने आ रही है कि फाइलों को घुमाने में ही समय निकाल दिया गया है। अभी तक इस ट्रामा सैंटर के निर्माण कार्य में 6 करोड़ 8 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। अब इसका विशेष कार्य जो रहता है वह 2 करोड़ 80 लाख के करीब रहता है।

बजट की भी नहीं है कोई कमी

स्वास्थ्य विभाग के पास बजट की भी कोई कमी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भी अधिकारी अपने काम को समय पर करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। हालांकि बीते महीनों में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इसका निर्माण कार्य समय पर निपटा लें, बावजूद इसके भी अधिकारियों की नींद नहीं उड़ी स्थिति जस की तस बनी हुई है। बता दें कि रामपुर में यह ट्रामा सैंटर पूर्व सांसद स्व. रामस्वरूप शर्मा की देन है। उन्होंने रामपुर बुशहर के लिए यह ट्रामा सैंटर केंद्र सरकार से देने की मांग उठाई व स्वीकृति लाई गई थी। उनके चले जाने के बाद ही इसका निर्माण कार्य अधर में लटक गया।