‘पंजाबी’ भाषा में लिखने होंगे दफ्तरों के नाम और अफसरों की नेम प्लेट, भाषा विभाग ने सभी विभागों के प्रमुखों को भेजा पत्र

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लुधियाना: राज्य के बड़े अधिकारी अब पंजाबी भाषा की अनदेखी नहीं कर सकेंगे। अफसरों को अपने दμतरों के नाम और अपनी नेम प्लेट पंजाबी भाषा में लिखनी होगी। अफसर अगर दμतर के नाम और अपनी नेम प्लेट पर अंग्रेजी में लिखवाना चाहते हैं तो उन्हें पंजाबी भाषा को पहले नंबर पर रखना होगा। दूसरी भाषाओं को पंजाबी के नीचे जगह दी जाएगी। राज्य भाषा विभाग के प्रिंसिपल सैक्रेटरी कृष्ण कुमार ने सभी विभागों के प्रमुखों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है। उन्होंने पत्र में साफ कहा है कि पंजाबी भाषा को तरजीह न देना सीधे-सीधे राजभाषा अधिनियम की उल्लंघना मानी जाएगी।

भाषा विभाग की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि सरकारी दफ्तरों, सभी विभागों, सरकारी व गैर सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों, सोसायटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड व्यापारिक व औद्योगिक संस्थानों, सड़कों के नाम, मील पत्थर, निजी स्कूलों, दिशा सूचकों समेत अन्य बोर्ड पंजाबी में लिखे जाएं। अगर कोई भी संस्थान या विभाग पंजाबी के अलावा अन्यू दूसरी भाषा लिखना चाहता है तो उन्हें पहले नंबर पर पंजाबी में लिखना होगा।

नजी शिक्षण संस्थान नहीं लिखते नाम

राज्य के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में तो पंजाबी को तरजीह दी जाती है लेकिन निजी शिक्षण संस्थान पंजाबी को प्राथमिकता नहीं देते हैं। ज्यादातर निजी स्कूलों के मुख्य बोर्डों पर पंजाबी नहीं दिखती। निजी स्कूल सिर्फ अंग्रेजी में अपने बोर्ड लिखवाते हैं। भाषा विभाग के प्रिंसिपल सैक्रेटरी कृष्ण कुमार ने स्पष्ट किया निजी शिक्षण संस्थानों को भी भाषा विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए पंजाबी को तरजीह देनी पड़ेगी।