Pegasus केस में जांच पैनल को 29 में से 5 फोन में एक प्रकार का ‘मालवेयर’ मिला : Supreme Court

Spread the News

नई दिल्ली: पेगासस के कथित अनधिकृत इस्तेमाल की पड़ताल के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल ने जांच किए गए 29 मोबाइल फोन में से 5 में एक प्रकार का ‘मालवेयर’ पाया है, लेकिन यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका कि इस ‘मालवेयर’ का कारण इसराइली ‘स्पाइवेयर’ है या नहीं। किसी कम्प्यूटर या मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने, उसे बाधित या नष्ट करने के मकसद से विशेष रूप से बनाए गए सॉμटवेयर को ‘मालवेयर’ कहा जाता है।

चीफ जस्टिस एन.वी. रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा, ‘समिति ने एक बात यह कही है कि भारत सरकार ने सहयोग नहीं किया। आप वही रुख अपना रहे हैं, जो आपने वहां अपनाया था।’ पीठ ने कहा कि पैनल ने 3 हिस्सों में अपनी ‘लंबी’ रिपोर्ट सौंपी है और एक हिस्से में नागरिकों के निजता के अधिकार तथा देश की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन करने का सुझाव दिया गया है।

पीठ ने तकनीकी पैनल की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यह ‘थोड़ी चिंताजनक’ है, क्योंकि जांच के लिए तकनीकी समिति के पास जमा किए गए 29 फोन में से 5 में ‘कुछ तरह का मालवेयर’ पाया गया, लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि ‘इसका कारण पेगासस है।’ पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में नागरिकों के निजता के अधिकार की सुरक्षा, भविष्य में उठाए जा सकने वाले कदमों, जवाबदेही, निजता की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कानून में संशोधन और शिकायत निवारण तंत्र पर सुझाव दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि वह पर्यवेक्षण जज रवींद्रन की सामान्य प्रकृति वाली रिपोर्ट को अपनी वैबसाइट पर अपलोड करेगा। पीठ ने कहा कि वह अन्य रिपोर्ट का संशोधित हिस्सा पक्षकारों को देने की अपील पर विचार करेगी। पीठ ने कहा, ‘यह एक बड़ी रिपोर्ट है। देखते हैं कि हम कौन-सा हिस्सा मुहैया करा सकते हैं।’ पीठ ने साथ ही कहा कि रिपोर्ट जारी नहीं करने का अनुरोध भी किया गया है।

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और राकेश द्विवेदी ने पीठ से वादियों के लिए ‘संशोधित रिपोर्ट’ जारी करने की अपील की। रिपोर्ट का जिक्र करते हुए पीठ ने जब कहा कि केंद्र ने सहयोग नहीं किया, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। कोर्ट अब 4 सप्ताह बाद इस विषय की सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि एक अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संघ ने दावा किया था कि पेगासस स्पाइवेयर के जरिए कथित जासूसी के संभावित लक्ष्यों की सूची में 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल फोन नंबर शामिल थे।