परमाणु समझौते के लिए सुरक्षा उपायों के मुद्दों का हल बेहद जरूरी : ईरानी विदेश मंत्री

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तेहरानः ईरानी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि तेहरान 2015 के परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए ‘फर्जी और राजनीतिक रूप से प्रेरित’ सुरक्षा उपायों के मुद्दों के समाधान को बेहद जरूरी मानता है। यह बात ईरानी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर कहीं गई। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ फोन पर हुई बातचीत में यह टिप्पणी की, जिसमें दोनों पक्षों ने कुछ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों और चल रहे परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन पर भी चर्चा की हैं।

अमीर-अब्दुल्लाहियन ने जिक्र किया कि ईरान ने व्यवहार में यह साबित कर दिया है कि ‘मजबूत और स्थायी’ समझौते की उसकी इच्छा गंभीर और वास्तविक है। उन्होंने कहा कि ईरान को बुधवार को यूरोपीय संघ (ईयू) के संभावित परमाणु समझौते के प्रस्तावित मसौदे पर तेहरान के विचारों पर अमेरिकी पक्ष की प्रतिक्रिया मिली और वह इसकी समीक्षा और मूल्यांकन कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने गुरुवार को कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सभी पक्ष परमाणु समझौते को फिर से शुरू करने की दिशा में काम करें, जिसे औपचारिक रूप से संयुक्त व्यापक कार्य योजना को जेसीपीओए के रूप में जाना जाता है। ईरान ने जुलाई 2015 में देश पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले में अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने को सहमत हो गया था और विश्व शक्तियों के साथ जेसीपीओए पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन को समझौते से बाहर कर दिया और तेहरान पर प्रतिबंध लगा दिए।

2015 के परमाणु समझौते के पुनरुद्धार पर बातचीत अप्रैल 2021 में वियना में शुरू हुई थी, लेकिन तेहरान और वाशिंगटन के बीच राजनीतिक मतभेदों के कारण मार्च में स्थगित कर दी गई थी। परमाणु वार्ता का नया दौर पांच महीने के अंतराल के बाद अगस्त की शुरुआत में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में आयोजित किया गया था। यूरोपीय संघ ने 2015 के परमाणु समझौते को बहाल करने पर मसौदा निर्णय का ‘अंतिम पाठ’ 8 अगस्त को सामने रखा था।

ईरान ने कुछ दिनों बाद यूरोपीय संघ के संभावित समझौते के मसौदे पर अपनी लिखित प्रतिक्रिया प्रस्तुत की, और बुधवार को यूरोपीय संघ के माध्यम से परमाणु वार्ता में बकाया मुद्दों के समाधान के बारे में तेहरान के विचारों पर अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया प्राप्त हुई थी।