फिल्म “सपनों का वन” ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों पर है केंद्रित

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विश्व में ऐसे बच्चे होते हैं, वे बहरे नहीं हैं, लेकिन वे बाहर की ध्वनि को नहीं सुन पाते। वे गूंगे नहीं हैं, लेकिन वे बोलना नहीं जानते हैं। वे आकाश में तारे की तरह अलग से चमक रहे हैं। वे हैं ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे। 17वें चीनी छांगछुन फिल्म दिवस इस हफ्ते उत्तर-पूर्वी चीन के चिलिन प्रांत के छांगछुन शहर में आयोजित किया गया। इस बार के फिल्म दिवस में कुल 40 फिल्मों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। उनमें फिल्म “सपनों का वन” तो ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों से केंद्रित है। यह फिल्म ऑटिज्म पीड़ितों और उनके परिवारों के विशेष समूह पर केंद्रित वास्तविक सामग्री पर आधारित है।

इस फिल्म में अकेली मां सु शियाओबेई और उनके ऑटिज्म से पीड़ित बेटे खांग च्येन की कहानी बताई गयी है। दादा यांग जैसे पड़ोसियों के साथ गलतफहमी से लेकर समझ तक, मनमुटाव से लेकर स्वीकृति तक, पूर्वाग्रह से देखभाल तक, वे तरह-तरह की कठिनाइयों को दूर करके अंत में समाज की देखरेख में अपने सपने को साकार किया है। आंकड़ों के अनुसार चीन में ऑटिज्म की व्यापकता दुनिया के अन्य देशों के बराबर है, जो लगभग 1 प्रतिशत है। चीन में 1 करोड़ से अधिक ऑटिस्टिक लोग हैं, जिनमें से 20 लाख से अधिक लोग ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे हैं। ऑटिज्म एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। और विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे बचपन नंबर एक मानसिक बीमारी के रूप में स्थान देता है। (साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)