कुष्ठ रोगियों की संख्या नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर

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चंडीगढ़: हरियाणा में अचानक कुष्ठ रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी होने के संकेत स्वास्थ्य विभाग को मिले हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। अक्तूबर माह में अभियान चलाकर न केवल प्रदेश के 6 जिलों में संदिग्ध कुष्ठ रोगियों की संख्या का पता लगाया जाएगा बल्कि उनके उपचार के लिए भी हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के कुष्ठ रोग शाखा ने अभियान को सिरे चढ़ाने के लिए आशा और मेल फ्रंट लाइन वर्कर को ट्रेनिंग भी देनी शुरू कर दी है। बाकायदा अभी हाल ही में गुरुग्राम में राज्यस्तरीय वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया है। इसमें ट्रेनियों को इंसान में कुष्ठ रोग की पहचान और उसके निदान के संबंध में ट्रेनिंग दी गई है। विभाग ने हाल ही में सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर कहा है कि वे अपने-अपने जिले की जिला जेलों में चेकिंग शिविर लगाकर संदिग्ध कुष्ठ रोगियों की पहचान करें। यदि कोई मिलता है तो तुरंत उसके उपचार की व्यवस्था की जाए।

तीन माह में सामने आए 154 नए केस स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से जून माह में करीब 154 नए केस सामने आए हैं जबकि पहले से 362 रोगियों का उपचार चल रहा है। हालांकि कुछ जिलों में कुष्ठ रोगियों की संख्या कम भी हुई है, लेकिन कुछ जिलों में एकाएक कुष्ठ रोगियों की संख्या बढ़ गई है। विभाग अक्तूबर में शुरू होने वाले अभियान के दौरान रोगियों की संख्या बढ़ने और घटने से जुड़े कारणों को भी जानने का प्रयास करेगा। जुलाई माह में 37 नए केस सामने आए हैं। पहले से उपचाराधीन केसों में 44 केस ऐसे भी हैं, जो ठीक हो गए हैं। इन जिलों में चलाया जाएगा अभियान कुष्ठ रोग विभाग द्वारा जिन जिलों में कुष्ठ रोगियों की संख्या बढ़ी है या घटी है, उनमें विशेष अभियान चलाया जाएगा। इनमें अंबाला, करनाल, झज्जर, गुरुग्राम, पानीपत और फरीदाबाद शामिल हैं। यहां 14 दिन तक लगातार अभियान चलाया जाएगा।

इस दौरान घर-घर जाकर चेकअप किया जाएगा। अगर कोई संदिग्ध कुष्ठ रोगी मिलता है तो आशा और मेल फ्रंट लाइन वर्कर के जरिए उसे नजदीक के अस्पताल में उपचार के लिए भेजा जाएगा ताकि इस समस्या को खत्म करने में ठोस कदम उठाए जा सकें। बाहरी लोगों के आवागमन भी बीमारी का एक मुख्य कारण कार्यक्रम में सहयोगी दंत चिकित्सक डॉ. गुलशन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा में रहने वाले लोगों के बीच कुष्ठ रोग की संख्या बेहद कम हैं, लेकिन यह उन लोगों में अधिक पाया गया है, जो बाहरी राज्य से आकर हरियाणा में बसे हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के आवागमन के साथ-साथ बीमारियां भी आवागमन करती हैं। जिसके चलते प्रदेश में कुष्ठ रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। अब इस पर अभियान चलाकर विराम लगाया जाएगा।