मानवाधिकार मुद्दे पर श्रीलंका के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किये जाने पर चीन का विरोध

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जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय और स्विट्ज़रलैंड स्थित अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के चीनी स्थायी प्रतिनिधि छन श्वू ने 12 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 51वीं बैठक में श्रीलंका की मानवाधिकार रिपोर्ट की संवाद में भाषण देकर श्रीलंका द्वारा मानवाधिकार की रक्षा करने के लिए किये गये प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने मानवाधिकार समस्या को लेकर श्रीलंका पर दबाव डालने और श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का विरोध किया।
छन श्वू ने कहा कि चीन श्रीलंका द्वारा मानवाधिकार की रक्षा करने, सुलह और पुनःनिर्माण को आगे बढ़ाने और आतंकवाद-रोधी कार्य में किये गये अथक प्रयासों की प्रशंसा करता है। श्रीलंका का परम्परागत मैत्रीपूर्ण पड़ोसी देश होने के नाते चीन श्रीलंका द्वारा देश की प्रभुसत्ता और स्वतंत्रता की रक्षा करने, सामाजिक स्थिरता की रक्षा करने और आर्थिक पुनरुत्थान को साकार करने का दृढ़ समर्थन करता है। चीन को विश्वास है कि श्रीलंकाई सरकार अवश्य ही लोगों की मुसीबतों को दूर कर सकेगी।

छन श्वू ने यह भी कहा कि श्रीलंका संबंधी मानवाधिकार परिषद का प्रस्ताव राजनीतिकरण का उत्पाद है, जो न्यायपूर्ण और वास्तविक सिद्धांत का पालन नहीं करता है। चीन किसी भी देश द्वारा श्रीलंका की परिस्थिति के बहाने से भू-राजनीति के स्वार्थ लाभ को पाने का विरोध करता है। चीन संबंधित पक्षों से नवाधिकार मुद्दे पर श्रीलंका पर दबाव न डालने और श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी न करने का आह्वान करता है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)