High Court ने आटे व दाल के वितरण डिपो धारकों की जगह एजेंसियों को देने के फैसले पर दिए Status Quo के आर्डर

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चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पंजाब में लाभार्थियों को गेहूं के आटे व दाल के वितरण अधिकार डिपो धारकों के बजाय अन्य एजेंसियों को देने के फैसले पर यथास्थिति के आदेश दिए। अदालत ने अगली सुनवाई तक काम को किसी अन्य पक्ष को जारी न किया जाने के आदेश दिए। कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर जवाब देने का भी आदेश दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस विकास सूरी ने एनएफएसए डिपो होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन बठिंडा की याचिका पर सुनवाई की। लाइसेंसिंग और नियंत्रण आदेश 2016 और राज्य प्राधिकरण उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क के माध्यम से अपने लाभार्थियों के बीच गेहूं/गेहूं का आटा वितरित करने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, हाल ही में पंजाब सरकार ने एनएफएसए से संबंधित गेहूं का आटा (आटा) निजी कंपनियों के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के दरवाजे पर देने निर्णय लिया है।

उचित मूल्य की दुकानों को दरकिनार कर घर तक गेहूं के आटे की डिलीवरी का यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन है। याचिका में पंजाब सरकार के इस आदेश को रद्द करने की मांग की गई। याचिका में सरकार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत पात्र उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क के माध्यम से गेहूं का आटा (आटा) वितरित करने के निर्देश देने की भी मांगे हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।