MP Vikramjit Singh की मांग: किताबों में हो सारागढ़ी चैप्टर, PM और शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाएंगे मुद्दा

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चंडीगढ़: आज हम 125 साल पहले हुई दिल को छूने वाली लड़ाई के शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट कर रहे हैं। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने सारागढ़ी की लड़ाई लड़ने वाले बहादुर 21 सिखों के महान बलिदान की प्रशंसा करते हुए, कहा कि सिख धर्म हमें बताता है कि हमें देश और समाज के लिए क्या करना चाहिए? दुनिया को सिखों से इंसानियत सीखनी चाहिए और यह हमारा फर्ज है कि हम सारागढ़ी की बहादुरी भरी लड़ाई से दुनिया को अवगत कराएं।

सारागढ़ी की लड़ाई के 21 बहादुर सिखों के बलिदान को श्रद्धांजलि भेंट करते हुए, राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह ने कहा कि बहादुरी को किसी शब्द से दर्शाया नहीं जा सकता, लेकिन हम फिर भी उन सिपाहियों के बलिदान में कुछ योगदान दे सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और देश के शिक्षा मंत्री से सारागढ़ी की लड़ाई को सभी भारतीय भाषाओं की स्कूली किताबों में शामिल करने की अपील की, ताकि छात्रों को इस बेमिसाल लड़ाई के बारे में पता लग सके। उन्होंने पंजाब के फिरोजपुर स्थित सारागढ़ी मेमोरियल के रिनोवेशन, सुंदरीकरण और विकास हेतु अपने संसदीय कोटे से 50 लाख रुपये देने का ऐलान भी किया। उन्होंने सारागढ़ी की लड़ाई की वास्तविक यादगार की हूबहू कॉपी नई दिल्ली में भी बनाए जाने का ऐलान किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ मरूफ राजा ने कहा कि विकिपीडिया में लिखा है कि यूके के बोल्गेम्प्टन में लोगों द्वारा दान किए गए एक लाख पाउंड से ईशर सिंह की एक 10 फीट ऊंची कांस्य की प्रतिमा स्थापित की गई है और बर्तानिया की संसद ने इसके लिए खड़े होकर तालियां बजाई थी। सिख बहादुर कौम है। इन 21 सिपाहियों को इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया था। यह एक बहादुरी भरी लड़ाई थी, जिसे खालसा का नारा देकर लड़ा गया था। यदि कोई देश अपने बहादुर का सम्मान नहीं करता, तो उसे महान देश कहलाने का अधिकार नहीं है।

मंच साझा करते हुए पूर्व सेना प्रमुख जनरल जेजे सिंह ने कहा कि यह जंग बहादुरी और हिम्मत की प्रतीक है और इसमें निर्भयता का प्रदर्शन किया गया है। यह हर स्तर के सभी नेताओं के लिए सबक है। सारागढ़ी के किले पर निशान साहिब था। 36वीं सिख रेजीमेंट से ब्रिगेडियर कंवलजीत सिंह यहां मौजूद हैं।

इस अवसर पर डॉ जोसन, प्रधान सारागढ़ी फाउंडेशन, डॉ तरलोचन सिंह पूर्व चेयरमैन अल्पसंख्यक आयोग, कंवलजीत सिंह बख्शी सांसद न्यूजीलैंड, हरमीत सिंह कालका प्रधान डीएसजीएमसी, रविंदर सिंह अहूजा प्रधान सिख फोरम, ब्रिगेडियर कंवलजीत सिंह चोपड़ा 36वीं सिख रेजिमेंट और अन्य उपस्थित गणमान्य ने यादगार समारोह हेतु सांसद विक्रमजीत सिंह के योगदान और प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद किया।