सिर्फ मां ही नहीं, पिता बनने के बाद पुरुष के अंदर भी होते हैं न्यूरोलॉजिकल बदलाव

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मैड्रिड: पहली बार मातापिता बनना एक बड़ा एडजस्टमैंट करना होता है। बच्चे के जन्म के बाद ज्यादातर सिर्फ मां के व्यवहार, शारीरिक बदलावों और समस्याओं का जिक्र किया जाता है। पिता बनने वाले पुरुष के बारे में कोई बात नहीं करता। कभी किसी ने यह सोचा है कि पुरुष के दिल और दिमाग पर पहली बार पिता बनने के बाद क्या असर होता है? नहीं, कोई इस पर बात नहीं करता और उनपर ध्यान नहीं दिया जाता।

हाल ही में एक अंतर्राष्ट्रीय स्टडी की गई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे पहली बार पिता बनने वाले पुरुषों की दिमागी स्थिति बदलती है। उनके अंदर भी न्यूरोलॉजिकल बदलाव होते हैं। स्टडी छोटी है लेकिन यह बताती है कि दिमाग के अंदर की परतें सिर्फ मां बनने वाली महिला की नहीं बदलती बल्कि पहली बार पिता बनने वाला पुरुषों के न्यूरल सबस्ट्रेट्स यानी आसान भाषा में कहें तो दिमाग की परतों में बदलाव आता है।

पहली और अब की स्टडीज में फर्क

पहले की स्टडीज में यह बताया गया था कि बच्चे के जन्म के बाद पिता बनने वाले पुरुष के दिमाग में थोड़ा बहुत बदलाव आता है। नई स्टडी में इस बात पर ध्यान दिया गया है कि कितना और कैसा बदलाव होता है। यह स्टडी मैग्नेटिक रेसोनैंस इमेजिंग डाटा पर आधारित है, जिसमें पहली बार पिता बने 40 लोगों के दिमाग का बच्चे के जन्म से पहले और बाद में विश्लेषण किया गया है। इसमें से 20 स्पेन के हैं और 20 अमरीका के। इसके अलावा स्पेन में 17 और लोगों के दिमाग का भी अध्ययन किया गया, जिनके बच्चे नहीं है। सबका डाटा एकसाथ जमा करने के बाद दो प्रयोगशालाओं में इनके दिमाग के वॉल्यूम, मोटाई और ढांचागत विकास की स्टडी की गई।

नई जिम्मेदारी और किरदार का असर

नई जिम्मेदारी और किरदार के साथ ही उनके ब्रेन पर असर पड़ता है, लेकिन इसके बारे में कहीं कोई चर्चा नहीं होती। स्टडी में यह बात सामने आई है कि पहली बार पिता बनने वाले पुरुषों के दिमाग में मौजूद कॉर्टिकल वॉल्यूम में एक या दो फीसदी की कमी आती है। यह एक तरह का सिकुड़न है, जो दिमाग के डिफॉल्ट मोड नैटवर्क से जुड़ा होता है। जैसे ही पुरुष इस बात को एक्सैप्ट करता है कि वह अब पिता बन चुका है, उसका दिमाग सिकुड़ने लगता है। यह स्टडी हाल ही में सेरेब्रल कॉर्टेक्स में प्रकाशित हुई है।

कॉर्टिकल वॉल्यूम

आपके लग रहा होगा कि कॉर्टिकल वॉल्यूम में आने वाली कमी कोई बुरी बात है, लेकिन असल में यह दिमाग की शुद्धता को बढ़ाता है, उसे ज्यादा रिफाइन करता है। इससे बच्चे के साथ उसका मानसिक संबंध बेहतर होता है। बच्चे से उसके रिश्ते में प्रेम पनपता है। मां बनने वाली महिलाओं के साथ ये थोड़ा सा ज्यादा होता है। इसलिए उनका बच्चे के साथ लगाव, प्रेम और संबंध ज्यादा घना और गहरा होता है।