इंटरनेशनल ईयर आफ मिलेट्स के तहत खेती विरासत मिशन की पहल, किये जायेंगे 75 जागरूकता कार्यक्रम

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चंडीगढ़ : पंजाब में इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स 2023 के लिए जागरूकता अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान की शुरुआत का आगाज मिलेट मैन ऑफ इंडिया डॉ. खादर वली के चंडीगढ़ दौरे से किया जा रहा है। खेती विरासत मिशन के फाउंडर उमेन्द्र दत्त ने बताया कि हमारा मिशन सतत कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण,पर्यावरणीय स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए सतत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स 2023 के लिए जागरूकता अभियान की शुरुआत का आगाज मिलेट मैन ऑफ इंडिया डॉ. खादर वली के पंजाब, चंडीगढ़ दौरे से कर रहा है। खेती विरासत मिशन पिछले एक दशक से मूल/ मोटे अनाजों/ मिल्लेट्स के मुद्दे पर गहनता से काम कर रहा है। इस दिशा में निरंतर प्रयास द्वारा यह भारत में ‘मिलेट मैन’ के नाम से विख्यात डॉ. खादर वली को पंजाब और चंडीगढ़ के दौरे पर आमंत्रित कर रहा है। उन्होंने आगे बताया कि 19, 20 व 21 सितंबर, 2022 इसके लिए निर्धारित किया गया है। 19 सितंबर को चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में इस इंटरैक्टिव सेशन के माध्यम से डॉ. खादर वली स्वास्थ्य पर्यावरण की दृष्टि से मोटे अनाज के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों और सामान्य जन को प्रेरित करेंगे । उमेन्द्र दत्त ने कहा कि यह एक ऐसा अनाज है, जो पानी की खपत कम करता है और इसके लिए किसी रसायन की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि इसे आवश्यक पोषक तत्वों का पावर हाउस कहा जाता हैं। इसलिए मूल / मोटे उगाना न केवल स्वच्छ पानी, उपजाऊ भूमि और हवा को सुनिश्चित करता है, बल्कि यह स्थायी रूप से स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है। मूल / मोटे अनाजों अर्थात मिल्लेट्स का उत्पादन और खपत सतत विकास, जल संरक्षण, पोषण, विषमुक्त आहार, प्राकृतिक खेती और फसली विविधता के समस्त लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

पीएम नरेंद्र मोदी के प्रगतिशील नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 2018 को राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र को 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित करने के लिए मनाने के लिए प्रेरित कर सकी। इसी श्रृंखला के अंतर्गत भारत के मिल्ट मैन के रूप में प्रसिद्ध डॉ. खादर वली खेती विरासत मिशन के निमंत्रण पर 1 से 20 सितंबर, 2022 को दिल्ली और चंडीगढ़ आ रहे हैं। डॉ. खादर वली स्वास्थ्य, पर्यावरण और किसानों को वहनीय खाद्य सुरक्षा के में मोटे अनाज की भूमिका पर सम्बोधित करेंगे । मूल अथवा मोटे अनाज बहुत ही कम पानी की खपत करते हैं और शायद ही उनकी खेती में कभी किसी रसायन की आवश्यकता होती हो। वे आवश्यक पोषक तत्वों की एक खान हैं। इसलिए मोटे अनाज को उगाना न केवल स्वच्छ पानी, मिट्टी और हवा को बनाए रखने में सहायक है, बल्कि यह स्वास्थ्य को स्थायी रूप से बनाए रखने का भी एक माध्यम भी है। मोटे अनाज के उत्पादन और खपत को पुनर्जीवित करना इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि विभिन्न हितधारकों को मोटे अनाज की ओर जाने के लिए राजी करने में चुनौतियां हैं। लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य लाभों को देखते हुए, यह जोखिम के लायक लगता है। इसी लिए केंद्र सरकार ने 2018 को राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया है और संयुक्त राष्ट्र को 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिल्लेट्स वर्ष घोषित करने के लिए प्रोत्साहित किया है।