राष्ट्रीय पार्क के निर्माण से यांग्त्ज़ी नदी संस्कृति की रक्षा करता है चीन

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यांग्त्ज़ी नदी चीन की सबसे लंबी नदी है, जो पीली नदी के साथ चीन की मातृ नदी मानी जाती है और चीनी संस्कृति का आश्रम स्थान है। यांग्त्ज़ी नदी छिंगहाई-तिब्बत पठार के थांगगुला पर्वत से निकलती है, जिसकी लंबाई 6,397 किलोमीटर है। यांग्त्ज़ी नदी नील नदी और अमेजन नदी के बाद दुनिया की तीसरी लंबी नदी है।

यांग्त्ज़ी नदी से जुड़ी एक संगोष्ठी में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा था कि यांग्त्ज़ी नदी चीनी राष्ट्र और चीनी सभ्यता का प्रतीक है। यांग्त्ज़ी नदी के प्राचीन अवशेषों और सांस्कृतिक विरासतों की रक्षा करने के साथ इसके सांस्कृतिक अर्थ पर अध्ययन करना चाहिए, ताकि श्रेष्ठ संस्कृति का नवीन विकास बढ़ सके।

यांग्त्ज़ी नदी के सांस्कृतिक अर्थ के महत्वपूर्ण वाहक होने के नाते प्राचीन अवशेष और सांस्कृतिक विरासत यांग्त्ज़ी नदी संस्कृति के लंबे इतिहास के साक्षी हैं। चीन के प्राचीन सभ्यता के इतिहास में इसका बड़ा महत्व है। अब तक चीन में 70 से अधिक प्राचीन मानव जीवाश्म स्थलों में 30 से ज्यादा यांग्त्ज़ी नदी घाटी में स्थित हैं। तीसरी राष्ट्रीय सांस्कृतिक अवशेष जनगणना के अनुसार यांग्त्ज़ी नदी के किनारे स्थित प्रांतों और शहरों में अचल सांस्कृतिक अवशेषों की संख्या 3 लाख 6 हजार से अधिक है, जो देश का 39.8 प्रतिशत है। इसके साथ राष्ट्र स्तरीय गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की संख्या 852 है और 11 राष्ट्रीय सांस्कृतिक व पारिस्थितिक संरक्षण क्षेत्र हैं।

यांग्त्ज़ी नदी व्यवस्था को नाड़ी के रूप में लेते हुए विभिन्न जातीय संस्कृतियां एक दूसरे के साथ आदान-प्रदान करती हैं और समृद्ध बनती हैं। ऐसे में अनंत, शानदार और रंगीन यांग्त्ज़ी नदी संस्कृति तैयार हुई और चीनी राष्ट्र का आध्यात्मिक घर बन गई।

नए युग में यांग्त्ज़ी नदी संस्कृति की रक्षा और विकास बढ़ाने के लिए वर्ष 2022 के शुरू में यांग्त्ज़ी नदी राष्ट्रीय सांस्कृतिक पार्क का निर्माण शुरू हुआ। इससे यांग्त्ज़ी नदी में निहित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संसाधन सक्रिय होने लगे। दुनिया को रंगारंग चीनी सभ्यता दिखाने के लिए इसका बड़ा महत्व है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)