यूएनएचआरसी में बच्चों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाने पर हुई चर्चा  

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सूचना तकनीक के तेज विकास ने हमारे सामने कई चुनौतियां भी पैदा की हैं। विशेष तौर पर इंटरनेट आदि का बच्चों पर बुरा प्रभाव देखा जा रहा है। क्योंकि उनके साथ आए दिन ऑनलाइन दुर्व्यवहार की घटनाएं होती हैं। लेकिन वर्तमान में वैश्विक स्तर पर इस बारे में कानूनों का अभाव है। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित माहौल प्रदान करने के साथ-साथ उनके अधिकारों और हितों की रक्षा करना जरूरी है।

इसी अहम विषय पर जिनेवा में 15 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 51वें सत्र के सम्मेलन के दौरान चर्चा की गयी। बैठक में उपस्थित विभिन्न प्रतिनिधियों ने साइबर स्पेस में बच्चों के वैध अधिकारों और हितों की बेहतर सुरक्षा पर अपने व्यावहारिक और उपयोगी अनुभव साझा किए।

बैठक में पेइचिंग किशोर कानूनी सहायता और अनुसंधान केंद्र की प्रमुख थोंग लीहुआ ने चीन में नाबालिगों के नेटवर्क सुरक्षा को मजबूत करने के नियमों के बारे में अवगत कराया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में बाल संरक्षण ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए और अधिक जरूरी मांगें पेश कीं हैं। इसके लिए न केवल अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुराष्ट्रीय इंटरनेट कंपनियों के बीच सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता है, बल्कि विकासशील देशों के लिए और अधिक व्यावहारिक सहायता प्रदान करने की भी जरूरत है। विकासशील देशों को अधिक कानूनी पेशेवर व्यक्तियों और प्रतिभाओं को तैयार करने में सहायता देनी चाहिए, ताकि डिजिटल युग में एक नए वैश्विक बाल संरक्षण तंत्र के निर्माण की नींव डाली जा सके। 

उधर, चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी के अधीन विश्वविद्यालय इंटरनेट कानून अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक ल्यू श्याओछुन ने कहा कि इंटरनेट सूचना सुरक्षा को बनाए रखने में चीन हमेशा बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। साथ ही बहु-स्तरीय कानून में सुधार करने और बच्चों की रक्षा वाले अभियान चलाने आदि माध्यमों से बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की प्रभावी रूप से रक्षा करता है। जिससे स्वस्थ और साफ़ नेटवर्क वातावरण बनाने के लिए ठोस गारंटी प्रदान की गई है। 

बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाने में न केवल कानून की दंडात्मक भूमिका पर ध्यान दिया जाना चाहिए, बल्कि निवारक भूमिका भी निभानी चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी के कारण काफी सुविधा तो मिलती है, लेकिन बच्चों को साइबर हिंसा और नुकसान के बढ़ते जोखिमों का सामना भी करना पड़ता है। उन्होंने बच्चों के अधिकारों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने के लिए डिजिटल युग में राष्ट्रीय विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

गौरतलब है कि जिनेवा में हुई इस बैठक का विषय “डिजिटल युग में राष्ट्रीय कानून निर्माण को मजबूत करें, बच्चों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाएं” था। जिसमें चीन, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड व संयुक्त राष्ट्र बाल कोष आदि संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

 (साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)