Shukra Pradosh Vrat: आज शुक्र प्रदोष व्रत पर इस शुभ मुहूर्त में करें शिव आराधना, मिलेगा लाभ

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शुक्रवार के दिन जो प्रदोष व्रत पड़ता है वो शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है। आज शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। इस व्रत को रखने के दौरान भगवान शिव जी की पूजा अर्चना की जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। माना जाता है की यह व्रत अपने जीवन और परिवार के बीच में सुख समृद्धि को बनाए रखने के लिए किया जाता है। आज के दिन भगवान शिव जी की आराधना करने से धन, संपत्ति, वैभव और सभी प्रकार के भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है। आइए जानते है इसकी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में:

शुक्र प्रदोष 2022 पूजा मुहूर्त
आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि की शुरूआतः 22 सितंबर, देर रात 01:17 बजे से
आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि की समाप्तिः 23 सितंबर, देर रात 02:30 बजे
शिव पूजा का शुभ समयः आज शाम 06 बजकर 17 मिनट से रात 08 बजकर 39 मिनट तक
सिद्ध योगः आज प्रातःकाल से सुबह 09 बजकर 56 मिनट तक
साध्य योगः आज सुबह 09:56 बजे से कल सुबह 09:43 बजे तक

प्रदोष व्रत और पूजा विधि
1. आज सुबह स्नान के बाद आपको भगवान शिव का स्मरण करके प्रदोष व्रत और पूजा का संकल्प करना चाहिए. इसके बाद दैनिक पूजन करें.

2. दिन में फलाहार और भक्ति-भजन करते हुए समय व्यतीत करें. उसके बाद शाम को प्रदोष मुहूर्त में किसी शिव मंदिर में जाकर पूजन करें या घर पर ही भोलेनाथ की पूजा करें.

3. सबसे पहले गंगाजल और गाय के दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें. उसके बाद उनको चंदन, भस्म, वस्त्र, फल, फूल, अक्षत्, बेलपत्र, शमी के पत्ते, धूप, दीप, गंध, नैवेद्य आदि से पूजन करें. इस दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें.

4. इसके बाद शिव चालीसा और शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें. फिर घी के दीपक से शिव जी की आरती करें. क्षमा प्रार्थना के बाद भोलेनाथ से मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें.

5. पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें. रात्रि के समय में जागरण करें. फिर अगले दिन सुबह स्नान के बाद पूजन करें. उसके बाद किसी गरीब ब्राह्मण को वस्त्र, फल, मिठाई, अन्न आदि का दान करें. दक्षिणा देकर विदा करें.

6. अब आप पारण करके प्रदोष व्रत को पूरा करें. यदि आपके यहां व्रत के रात ही पारण होता है तो उस तरह से ही पारण कर लें.

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं. दुर्भाग्य को दूर करके सौभाग्य प्रदान करते हैं. प्रदोष व्रत सभी कष्टों और दुखों को दूर करने वाला है. इस व्रत को करने से ग्रह दोष भी दूर होंगे.