जापान को जन इच्छा का सम्मान कर सागर में परमाणु दूषित जल छोड़ने की योजना बंद कर देनी चाहिए

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जापान के कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने 21 सितंबर को टोक्यो बिजली कंपनी और जापान के आर्थिक विभाग को एक संयुक्त पत्र सौंपकर फुकुशिमा नंबर एक प्रमाण बिजली घर की दूषित पानी महासागर में छोड़ने का विरोध किया और जापान सरकार से अन्य निस्तारण उपाय अपनाने की मांग की, जिस पर 42 हजार लोगों ने हस्ताक्षर किये।

इस पत्र में कहा गया कि हमें चिंता है कि दूषित पानी छोड़ने से फुकुशिमा के मछली उद्योग की पूरी बहाली और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

हाल ही में टोक्यो बिजली कंपनी ने खबर जारी की कि प्रदूषित जल की निकासी के बाद एकत्र हुए नमूने के विश्लेषण में पाया गया कि स्ट्रोनट्यम-90 गतिविधि एकाग्रता जापान के राष्ट्रीय मापदंड से तीन गुना अधिक है। इससे जाहिर है कि निपटारे के बाद परमाणु प्रदूषित जल का सुरक्षित होना झूठी बात है। जापान के आंकड़े की विश्वसनीयता, संशोधन उपकरण की प्रभावकारिता और पर्यावरण पर प्रभाव की अनिश्चितता के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शंका युक्तियुक्त है और जापानी जनता का दूषित जल महासागर में छोड़ने का विरोध करने का औचित्य है।

वर्ष 2011 में फुकुशिमा नंबर 1 बिजली घर में सर्वोच्च श्रेणी वाली परमाणु घटना हुई, जिससे बड़ी मात्रा में दूषित पानी हुआ और जापान के दस से अधिक जिलों की मृदा और समुद्रीय जल भी प्रदूषित हुईं। हाल ही में चीन के थाईवान क्षेत्र में जापान गुंमा जिले से आयातित कोंजाकु फ्लोर में रेडियोधर्मी पदार्थ सीज़ियम-137, सीज़ियम-134 पाया गया, जिससे थाईवानी लोगों को बड़ा गुस्सा आया।

फुकुशिमा परमाणु प्रदूषित पानी का निपटारा सिर्फ जापान की बात नहीं है। वह वैश्विक समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और विभिन्न देशों की जनता की स्वास्थ्य से जुड़ी है। जापानी सरकार को इस सवाल का सामना कर दूषित जल को सागर में छोड़ने की खतरनाक काररवाई बंद करनी चाहिए। (साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

 

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