लगातार बारिश के कारण धान की फसल को भारी नुकसान, किसानों की बढ़ी चिंता

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जालंधर: पंजाब में धान की फसल की मंडी में खरीद की तैयारी शुरू हो गई है। वहीं लगातार दो दिनों से हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दो दिन से हो रही बारिश से धान के खेतों में पानी भर गया है। राज्य के कई जिलों के शहरों में फसल बिखर गई है। चीनी वायरस नामक बीमारी से उबर भी नहीं पाए थे कि बारिश ने एक बार फिर उनके माथे पर चिंता की लकीरें खड़ी कर दीं। धान की वह फसल जो कटाई के कुछ दिनों बाद बाजार में पहुंचनी थी, इस बारिश से वह फसल पूरी तरह पानी से भीग गई है। बारिश से धान और मक्की की फसल को नुक्सान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में फलियों का प्रकोप है, इस बारिश से बासमती को काफी नुक्सान हुआ है। कल से हो रही बारिश से धान की किस्म को काफी नुक्सान हुआ है। संगरूर में किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश से धान की फसल बर्बाद हो गई है। उनका कहना है कि इस मौसम में धान को पकने के लिए धूप की तपिश की जरूरत थी, लेकिन बारिश और तेज हवाओं ने धान की फसल को बर्बाद कर दिया है। महानगर के किसानों का कहना है कि सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि किसान पहले से ही चीनी वायरस से परेशान हैं और उसके बाद फसल खराब होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि गन्ने की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है और अगर इस बारिश से यह बह गई तो इसकी वृद्धि रु क जाएगी।

बारिश से उपज के साथ गुणवत्ता पर भी पड़ेगा असर

भारी बारिश को कृषि विशेषज्ञ बेहतर नहीं मान रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि पंजाब में कई जगहों पर लगातार बारिश से खरीफ फसलों, खासकर धान और कपास को नुक्सान हो सकता है। उन्होंने कहा कि फसलों की कटाई में देरी के अलावा, बेमौसम बारिश न केवल उपज बल्कि फसल की गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगी। वहीं पंजाब कृषि विभाग के निदेशक गुरविंदर सिंह के मुताबिक इस स्तर पर बारिश अगर दो-तीन दिनों तक जारी रहती है तो खरीफ फसलें प्रभावित होंगी। यह धान की फसल की उपज और गुणवत्ता को प्रभावित करेगी जो कटाई के चरण में है।

भारी बारिश से गिरी फसलें, कठिन होगी कटाई

कई राज्यों में खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान पक्क कर तैयार हो गई है जिसकी कटाई की प्रक्रिया शुरू होने को है। लेकिन, बीते दिनों हुई भारी बारिश से फसलें खेत में गिर गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हवा के साथ बारिश से धान की फसल चपटी हो गई है, जिससे फसलों की कटाई करना मुश्किल हो जाता है।

नमी बढ़ने से गुणवत्ता प्रभावित होगी

हवा और भारी बारिश की वजह से धान की फसलें चपटी होने से एक तरफ जहां किसानों को कटाई में मुश्किल का सामना करना पड़ेगा, तो वहीं इससे फसलों में नमी बढ़ जाती है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार फसल में नमी का स्तर बढ़ने से इसकी गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अनाज के रंग बदलने की भी संभावना है।