ज़िंदा समझकर डेढ़ साल शव के साथ रहा परिवार, 24 घंटे चला AC और रोज़ बदलते थे कपड़े

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कानपुरः उत्तर प्रदेश के ज़िला कानपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां कृष्णापुरी इलाके में एक परिवार डेढ़ साल तक लाश के साथ रहा। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 35 वर्षीय आयकर अधिकारी विमलेश सोनकर की मौत हो गई थी। वह कोरोना से संक्रमित थे और 22 अप्रैल, 2021 को उनकी मौत हो गई थी। विमलेश कुमार आयकर विभाग में अहमदाबाद में असिस्टेंट ऑफिसर पद पर तैनात थे।

जिंदा मानकर शव को लाए घर
अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट जारी करते शव परिवार वालों को सौंप दिया था, लेकिन अंतिम संस्कार के समय परिवार को विमलेश के शरीर में हरकत महसूस हुई। जब परिवार ने विमलेश के हाथ में ऑक्सीमीटर लगाया तो उसमें पल्स रेट और ऑक्सीजन लेवल बताने लगा। ऐसे में उन्होंने विमलेश का अंतिम संस्कार नहीं किया। परिवार ने उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी कोरोना की वजह से उनकी बात ठीक से नहीं सुनी। ऐसे में वह विमलेश को घर ले गए क्योंकि उन्हें लगा वह कोमा में है और वह उसे घर ले आए।

इसलिए नहीं आई शरीर से बदबू

घर में विमलेश के 2 भाई व उनकी पत्नियां, बच्चे, माता-पिता एक साथ रहते हैं। विमलेश की पत्नी मिताली कोऑपरेटिव बैंक में काम करती हैं। सभी परिवार वाले उन्हें जिंदा समझकर सेवा में लग गए। परिवार विमलेश के शव को डिटॉस से साफ करता था। इसके अलावा रोजाना उनके कपड़े और बिस्तर बदला जाता था। रोज तेल से मालिश की जाती थी। यही नहीं, जिस कमरे में विमलेश की बॉडी रखी गई थी, वहां AC 24 घंटे ऑन रहता था। परिवार ने शव की ऐसी सेवा की कि पड़ोसियों को भी भनक नहीं लगी।

ऐसा हुआ खुलासा

डेढ़ साल तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन फिर ड्यूटी पर ना पहुंचने की वजह से आयकर विभाग की टीम उनके घर पहुंची और घर में उनकी ममी बन चुकी उनकी लाश को देखकर हैरान रह गई। इसके बाद डॉक्टर, ACP और थाना पुलिस को बुलाया गया। जांच के बाद सारी सच्चाई सामने आई।

चूंकि कोई आपराधिक मामला नहीं था इसलिए परिवार वालों के प्रार्थना पत्र पर बिना पोस्टमॉर्टम किए शव उन्हें सौंप दिया गया। मगर, अब उन्हें अंतिम संस्कार करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।