क्या एआई तकनीक मानव अनुवादक की जगह ले सकेगी?

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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 मई, 2017 को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें यह कहा गया कि व्यावसायिक अनुवादक विभिन्न देशों के बीच आपसी संपर्क रखने और शांति, समझ और विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। साथ ही, 30 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस की स्थापना करने की घोषणा भी की गयी। वर्ष 2022 में इस दिवस का मुद्दा है एक बाधा रहित दुनिया। लेकिन विज्ञान व तकनीक की निरंतर प्रगति के साथ एआई तकनीक का तेज़ विकास हो रहा है। मशीनी अनुवाद का उपयोग अधिक से अधिक होता जा रहा है और इसकी सटीकता में भी सुधार हो रहा है, जिसने अनुवाद उद्योग की संभावना पर कुछ प्रभाव डाला है।

वर्तमान में अनुवाद बाजार में अधिकतर कार्य तकनीक व वाणिज्य क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं, इसलिये अनुवाद की कलात्मकता के प्रति ज्यादा मांग नहीं की गयी। पर कला और प्रौद्योगिकी के सही संयोजन का प्रतिनिधित्व करने वाला साहित्यिक अनुवाद अभी तक केवल मानव अनुवादक कर सकते हैं।

क्यों ये काम मशीन नहीं कर सकते?क्योंकि एआई अनुवाद में मानवीय भावनात्मक अभिव्यक्ति, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सामाजिक संचार कौशल, बातचीत कौशल, सहानुभूति, रचनात्मकता और सौंदर्यशास्त्र के साथ-साथ दूसरों के लिए वास्तविक मदद और चिंता का अभाव है। इसलिये यह कहा जा सकता है कि अनुवाद तकनीक और कला का सही संयोजन है, और मशीनें अभी तक मानव मस्तिष्क की लचीली अभिव्यक्तियों की जगह नहीं ले सकती हैं।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)