अधिक विवरण उजागर!एनएसए साइबर चोरी से छिपाने के लिए कहीं नहीं है

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चीनी राष्ट्रीय कंप्यूटर वायरस आपात प्रतिक्रिया केंद्र और 360 कंपनी के संयुक्त तकनीकी दल ने 27 सितंबर को चीन की उत्तर-पश्चिम पॉलिटेक्निकल यूनिवर्सिटी को विदेशी साइबर हमले के संदर्भ में दूसरी जांच रिपोर्ट जारी की। इस नवीनतम रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) के अधीनस्थ टेलर्ड एक्सेस ऑपरेशन कार्यालय (टीएओ) द्वारा इस यूनिवर्सिटी के खिलाफ हजारों साइबर हमलों के अधिक महत्वपूर्ण विवरणों का खुलासा किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पश्चिम पॉलिटेक्निकल यूनिवर्सिटी पर साइबर हमला करने की प्रक्रिया में टीएओ ने चीन के बुनियादी ढांचे में प्रवेश कर नियंत्रण को बखूबी अंजाम दिया, और इसका उपयोग कर चीनी उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा की चोरी करने तथा संवेदनशील पहचान वाले कई व्यक्तियों की उपयोगकर्ता जानकारी के बारे में अवैध पूछताछ की। यह एक खुला रहस्य है कि अमेरिका लंबे समय से बड़े पैमाने पर साइबर चोरी में संलग्न है। इस साल चीनी इंटरनेट कंपनियों द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले एक दशक में एनएसए ने साइबर हथियारों का इस्तेमाल कर चीन, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित दुनिया भर के 47 देशों और क्षेत्रों में 403 लक्ष्यों पर साइबर हमले किए हैं।

हालाँकि, इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि एनएसए ने अपने साइबर हमले कैसे शुरू किए। संबंधित चीनी एजेंसियों द्वारा जारी जांच रिपोर्ट में उत्तर-पश्चिम पॉलिटेक्निकल यूनिवर्सिटी पर एनएसए के साइबर हमले के रास्ते, समय और यहां तक ​​कि गलतियों की विस्तृत बहाली और प्रदर्शन किया गया और 13 हमलावरों की असली पहचान की गई। यह भारी सबूत अमेरिका द्वारा मनमाने ढंग से साइबर आधिपत्य करने का शक्तिशाली जवाबी हमला है।

अमेरिका एक तरफ़ दुनिया की अग्रणी नेटवर्क तकनीक का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर निगरानी और चोरी करता है, और दूसरी तरफ़ वह खुद को “पीड़ित” बताता है। उसने तथाकथित “चीनी हैकर्स” का नामकरण करने की रणनीति का उपयोग किया, यहां तक कि अपने साथियों को इकट्ठा कर चीन पर साइबर हमला शुरू करने की बदनामी की। चीन द्वारा प्रस्तुत इस जांच रिपोर्ट से सारी दुनिया स्पष्ट रूप से देख सकती है कि कौन पीड़ित है, कौन अपराधी है, और कौन जानबूझकर लोगों की राय को गुमराह करता है।

साइबर सुरक्षा बनाए रखने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। यह नहीं होना चाहिए कि एक देश सुरक्षित है और दूसरा देश सुरक्षित नहीं है। कुछ देश सुरक्षित हैं और अन्य देश नहीं हैं। और यह भी नहीं होना चाहिए कि दूसरे देशों की सुरक्षा की कीमत पर अपनी तथाकथित पूर्ण सुरक्षा की मांग की खोज की जाए। अमेरिका को चीन पर दुर्भावनापूर्ण साइबर हमलों को तुरंत रोकना चाहिए। साइबर स्पेस में मनमाने ढंग से काम करने और जनमत के क्षेत्र में श्वेत-श्याम को उलटने का अमेरिका का युग समाप्त हो गया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)