पर्यावरण को Circular Economy मानकर बनानी होंगी योजनाएं: Manohar Lal

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि भगवान की देन से पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है, जहां मानव जीवन संभव है और यहां पर पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन चक्र चलता आ रहा है। जीवनभर संकट और चुनौतियां आती-जाती रहती हैं। दिन-प्रतिदिन बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण आज मानवता के लिए चुनौती बन गया है। अब हमें पर्यावरण को सर्कुलर इकोनॉमी मानकर योजनाएं बनानी होंगी। इसके लिए पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों को भी मिलकर कार्य करना होगा। वह आज पंचकूला में आयोजित जिला पर्यावरण योजना के क्रियान्वयन के वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। समारोह में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के चेयरमैन न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के दौरान जब पूरा विश्व महामारी से जूझ रहा था, तब भी हम बेहतर योजनाओं व इच्छा शक्ति से कार्य करके इस चुनौती से लड़े। आज कई वन्य प्राणियों की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। विलुप्त वन्य प्राणियों की प्रजातियों को बचाना व जल संरक्षण समय की जरूरत है।

आज हम दूसरे देशों को भी अनाज निर्यात करते ह
उन्होंने कहा कि जब देश में खाद्यानों का संकट आया था, तब उस समय हरित क्रांति का आह्वान किया गया और आज हम देश के लिए खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर ही नहीं बने बल्किदूसरे देशों को भी अनाज निर्यात करने लगे हैं। उस दौर में खाद्यान्न की गुणवत्ता को भूलकर रासायनिक खादों का उपयोग करके अधिक मात्रा में उत्पादन करने पर जोर दिया और इससे भूमि की उर्वरक शक्ति में भी कमी आई। आज उस समस्या से निपटने के लिए प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की अवधारणा को अपनाया जा रहा है। भावी पीढ़ी को विरासत में भू-जल मिले, इसके लिए हरियाणा में मेरा पानी मेरी विरासत योजना लागू की गई है। धान की जगह कम पानी से तैयार होने वाली अन्य फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 7 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अब एसटीपी के उपचारित पानी का पुन: उपयोग हो, इसके लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। अब घरों में विशेषकर शहरों में पीने के पानी व अन्य जरूरतों के लिए उपचारित पानी के अलग उपयोग के लिए अलग अलग पाइप लाइन की व्यवस्था करनी होगी।

नई तकनीक के अनुरूप बनानी होंगी योजनाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक के अनुरूप योजनाएं बनानी होंगी। जितना खर्च आवश्यक है, उतना ही करना चाहिए। हर छोटे शहर में ई वेस्ट, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन के संयंत्र लगाने होंगे। हरियाणा में लगभग 18 हजार तालाब हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्र में 8 हजार ओवरफ्लो तालाब हैं। ऐसे तालाबों के पानी को उपचारित करके सिंचाई के लिए इसका उपयोग हो, इसके लिए सूक्ष्म सिंचाई की योजनाएं बनाई जा रही हैं। तालाब के निकट के क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई के लिए तालाब के उपचारित पानी का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा।

एनजीटी के चेयरमैन ने पर्यावरण संरक्षण के लिए की गई पहल पर की हरियाणा की प्रशंसा
हल पर की हरियाणा की प्रशंसा एनजीटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण की पहल की है। उनकी यह पहल देश को एक नई दिशा देगी। जिला पर्यावरण योजना संविधान के प्रावधानों में है और पंचायत से लेकर देश के हर जनप्रतिनिधि को इसके क्रियान्वयन में सहयोग करना है। आज मनोहर लाल की भावनात्मक रूप से कार्य करने और समस्याओं का स्थाई हल निकालने के लिए योजनाएं तैयार करने की छवि बनी है। मुख्यमंत्री के आने के बाद हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जितना काम हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्तर पर कचरा प्रबंधन व पर्यावरण संरक्षण की सोच एक ऐतिहासिक पहल है। पीने के पानी को सुरक्षित करने की पहल भी शायद ही किसी मुख्यमंत्री ने सोची है। इसके लिए पीने के पानी व अन्य उपयोग के लिए उपचारित पानी के अलग-अलग पाइप लाइन भी लगवाई।