मशीनीकरण ने चीनी कृषि को बदल दिया है

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हाल में दक्षिणी चीन में शुरुआती चावल की कटाई और देर चावल रोपने का काम पूरा किया गया है। पर मशीनीकरण कायम होने से पहले, यह किसानों के लिए की सबसे कठोर अवधि थी। किसानों को हर दिन जल्दी उठना और देर से बिस्तर पर जाना, अच्छी फसलों के लिए दौड़ना पड़ता था। साथ ही किसानों को मौसम परिवर्तन के बारे में भी चिंतित रहना पड़ता था। आज, चावल के खेतों में रोपण, खेत प्रबंधन या कटाई सब का मशीनीकरण कायम हो चुका है, किसानों को अत्यधिक भारी श्रम में संलग्न होना नहीं पड़ता है, बल्कि यह सब पूरा करने के लिए विभिन्न मशीनरी का संचालन करना है।

दक्षिणी चीन की जलवायु एक ही वर्ष में दो बार चावल रोपने के लिए उपयुक्त है। हालांकि, ऐसे युग में जो काफी हद तक मानव और पशु शक्ति पर निर्भर था, चावल की फसलों और रोपण की अवधि बेहद तंग थी। किसानों को मौसम के साथ दौड़ करनी पड़ती थी, ताकि चावल की समय पर कटाई की जा सके। क्योंकि खेती के समय में देरी होने पर चावल की फसल बहुत कम हो जाएगी, और अगर मौसम बदलता है, तो फसल भी बर्बाद हो सकती है। उस समय खेती में कटाई, थ्रेसिंग, अनाज सुखाने, जुताई और चावल की रोपाई सभी मानव और पशु शक्ति पर निर्भर थे। किसान उच्च तापमान में सबसे कठिन काम में लगे हुए थे। साथ ही बाढ़ एवं तूफान आदि से भी भारी नुकसान पैदा होगा। अथक प्रयासों के बाद, आज चीनी कृषि में भारी बदलाव आया है। सरकार के मार्गदर्शन में, अधिकांश कृषि भूमि को पेशेवर किसानों के द्वारा अनुबंधित किया गया है। गांववासी अपने खेतों को पेशेवरों को उप-ठेके पर देने के बाद, शहरों में काम करने या अन्य उद्योगों में संलग्न होने के लिए अपना समय खाली करते हैं। सरकार के समर्थन में पेशेवर किसान अनाज उत्पादक मशीनीकृत और स्वचालित रोपण को साकार करने के लिए बड़े खेत में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, पेशेवर संगठन भी सभी सामाजिक सेवाएं प्रदान करते हैं जैसे कि बीज खरीद, अंकुर उगाना, अंकुर प्रत्यारोपण,  खेती प्रबंधन, कटाई, सुखाने, भंडारण, प्रसंस्करण और बिक्री आदि। खेत में जो श्रम है, मानव और पशु शक्ति का उपयोग नहीं होता है, लेकिन पूरी तरह से विभिन्न कृषि मशीनरी और ड्रोन द्वारा किया जाता है। चावल की कटाई के बाद, सूरज को उजागर करने की कोई आवश्यकता भी नहीं है, और ड्रायर से अनाज को सुखाया जा सकता है। चीनी कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीन में प्रमुख अनाज फसलों जैसे गेहूं, मक्का और चावल की मशीनीकरण दर क्रमशः 97%, 90% और 85% तक पहुंच गई है।

चावल उत्पादन के उन्नयन से पता चलता है कि चीन में कृषि उत्पादन मानव और पशु शक्ति पर निर्भर होने से मशीनरी में स्थानांतरित हो गया है। अब चीनी कृषि मशीनीकरण, स्वचालन और सूचनाकरण के प्रभुत्व वाले एक नए चरण में प्रवेश हो गयी है। चीनी किसानों ने भी पुराने श्रम तरीके को विदाई दी, आज वे नए श्रमिक बनकर बौद्धिक श्रम के लिए मशीनरी संचालित करते हैं। चीन के कृषि विकास में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति की योगदान दर 61% तक पहुंच गई है। विभिन्न कृषि मशीनरी और उपकरणों के मशीनीकरण, बुद्धिमत्ता और सटीकता से जाहिर है कि चीनी कृषि आधुनिकीकरण की ट्रेक पर पहुंच गयी है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)