श्री देवी तालाब में स्थित एक ऐसा मंदिर जहां महिलाओं को सिर्फ दशहरे के दिन मिलती है जाने की इजाजत, जाने क्यों

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भारत देश इतिहास व प्रभु की आस्था की मान्यताओं से भरा हुआ है। मान्यताओं का ऐसा ही एक उदाहरण आपको पंजाब के महानगर जालंधर में शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में देखने को मिलेगा। श्री देवी तालाब मंदिर के मुख्य सेवादार राजेश महेंद्रु ने बताया की यहां पर स्थित मां काली जी के मंदिर में महिलाओं और बच्चों को जाने की इजाजत नहीं है। लेकिन सिर्फ विजय दशमी के पर्व पर ही महिलाओं को यहां जाने की इजाजत दी जाती है।

वैसे तो सारा वर्ष मंदिर भक्तों के दर्शन व पूजन के लिए खुला रहता है लेकिन दशहरे के पावन पर्व पर महिलाएं व बच्चे मां के मंदिर में दर्शनों के लिए जा सकते हैं अन्य पूरा वर्ष सिर्फ पुरुष ही जा सकते हैं। इसके पीछे की मान्यता को बताते हुए उन्होंने आगे बताया की कुछ वर्ष पहले मोनी बाबा की ओर से मां काली की साधना के लिए मंदिर परिसर के गुंबद के पास (ऊपरी मंजिल) मां काली की प्रतिमा स्थापित की थी जहां अखाड़े में आने वाले पहलवान पहलवानी करने के बाद मां की आस्था के लिए आते थे, लेकिन महिलाओ का आना वर्जित था जिसके बाद कुछ पहलवानों की ओर से मोनी बाबा से विनती की गई कि उनके परिवार को भी दर्शनों के लिए इस मंदिर में आने की इजाजत दी जाए।

वहीं इसके पीछे यह भी मान्यता रही है कि साधना के दौरान कुछ महिलाओं व बच्चों की ओर से शोर मचाए जाने पर साधना व ध्यान भंग होता था जिसके चलते मोनी बाबा की ओर से रोक लगाई गई थी लेकिन पहलवानों पुरुष भक्तों की विनती पर मोनी बाबा ने साल में 1 दिन दशहरे पर पर मंदिर में भक्तों के साथ-साथ महिला भक्तों को बच्चों को आने की इजाजत दी जिसके चलते हर वर्ष मूर्ति स्थापना के दिवस दशहरे पर मंदिर सभी भक्तों के लिए सारा दिन खुला रहता है व भजन कीर्तन के साथ साथ अन्य आयोजन भी किए जाते हैं।

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